श्रीराम कथा में शिव विवाह प्रसंग का वर्णन: कुंडा के परानूपुर में पूज्य राजन जी महाराज की कथा में उमड़ी भीड़, भक्ति गीतों पर थिरके

रिपोर्टर अनुराग उपाध्याय

कुंडा के परानूपुर (श्रृंगवेरपुर धाम के समीप) में चल रही श्रीराम कथा के दूसरे दिन, रविवार को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का वर्णन सुनकर श्रोता भावविभोर हो उठे। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथावाचक पूज्य राजन जी महाराज ने शिव विवाह प्रसंग को इतनी भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया कि पूरा पंडाल “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। कथा का आयोजन आनंद पांडेय के संयोजन में किया गया है। पूज्य राजन जी महाराज ने भगवान श्रीराम और माता सीता से जुड़े विभिन्न तीर्थ स्थलों का उल्लेख करते हुए निषादराज गुह और केवट प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। इसके साथ ही उन्होंने माता सती के त्याग, भगवान शिव की तपस्या और कामदेव के दहन की कथा भी सुनाई। उन्होंने कहा कि कथा सुनने से जीवन की व्यथा समाप्त होती है और मन को शांति प्राप्त होती है।

महाराज ने बताया कि माता पार्वती के पुनर्जन्म के बाद महादेव से विवाह का समय आया तो देवताओं और समस्त लोकों में उल्लास फैल गया। जब शिव बारात लेकर हिमालय पहुंचे, तो देवी पार्वती भयभीत हो उठीं। लेकिन नारद जी के आगमन और पूर्व जन्म की कथा सुनाने के बाद उनका भय दूर हो गया। अंततः शिव-पार्वती का दिव्य विवाह सम्पन्न हुआ, जिसकी झांकी सुनते ही उपस्थित श्रद्धालु भावनाओं से अभिभूत हो उठे।

भक्तों की भारी भीड़ देख कथावाचक गदगद

कथा के दौरान पूज्य राजन जी महाराज ने कहा कि उन्होंने अनेक स्थानों पर कथा सुनाई है, परन्तु प्रतापगढ़ जैसी श्रद्धा और अनुशासन कहीं नहीं देखा। प्रारंभ में जब वे कथा स्थल पर पहुंचे, तो उन्हें लगा कि इतना बड़ा पंडाल शायद न भरे, लेकिन पहले ही दिन भक्तों की भीड़ ने समूचा पंडाल भर दिया। दूसरे दिन स्थिति यह रही कि महाराज को मंच से ही सभी पर्दे खुलवाने पड़े ताकि बाहर बैठे श्रद्धालु भी कथा का आनंद ले सकें। उन्होंने आयोजन समिति से आग्रह किया कि बाहर बैठे भक्तों के लिए विशेष बैठने की व्यवस्था की जाए।

भजनों पर झूम उठे श्रद्धालु

कथा के दौरान पूज्य राजन जी महाराज द्वारा गाए गए भक्ति भजनों ने ऐसा वातावरण बनाया कि महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे सभी झूम उठे। “भवसागर से पार उतारे, नाम राम का प्यारा…” और “श्रृंगार हो खता शिव दूल्हा सरकार के सिंगार हो खता भोले जी के सिंगर करें” जैसे भजन गूंजते ही पूरा पंडाल नृत्य और जयघोष से भर गया। उपस्थित भक्त भक्ति रस में डूबे नजर आए — कोई ताली बजा रहा था तो कोई आंखों में आंसू लिए प्रभु नाम का गुणगान कर रहा था।

 

सुरक्षा और व्यवस्था भी पुख्ता

 

भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए आयोजन समिति ने पर्याप्त सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की थी। पंडाल में शीतल जल, प्रसाद वितरण और चिकित्सा सहायता की विशेष व्यवस्था की गई। स्थानीय प्रशासन के सहयोग से पार्किंग और मार्गदर्शन की सुविधा भी सुचारू रूप से संचालित रही।