उन्मुक्त उड़ान मंच पर रंगोत्सव की धूम 

उन्मुक्त उड़ान मंच पर रंगोत्सव की धूम

 

उन्मुक्त उड़ान मंच पर पंचदिवसीय रंगोत्सव का सफल आयोजन

उन्मुक्त उड़ान मंच पर होली के पावन अवसर पर पंचदिवसीय रंगोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश-विदेश के रचनाकारों ने इंद्रधनुषी रंगों से सजे भावों और शब्दों के माध्यम से साहित्यिक वातावरण को रंगमय बना दिया।

पंचोत्सव का शुभारम्भ मंच की अध्यक्षा एवं संस्थापिका डा० दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ के प्रेरणादायी उद्बोधन से हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि होली फाल्गुन पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला प्रेम, भाईचारे और उल्लास का प्रमुख भारतीय पर्व है। यह बुराई पर अच्छाई (होलिका दहन) की विजय, वसंत ऋतु के आगमन तथा सामाजिक समरसता का संदेश देता है। यह पर्व आपसी मतभेद भुलाकर रंगों के माध्यम से जीवन में खुशियाँ, सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संचार करता है।

“होली और हमजोली” विषय से आरम्भ हुए रंगोत्सव में 28 रचनाकारों ने भाग लिया और गीतों के माध्यम से मनहरण घनाक्षरी पर आधारित अपनी-अपनी वीडियो प्रस्तुति दी। आयोजन प्रभारी नीतू रवि गर्ग ‘कमलिनी’ ने अपने दायित्व का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया।

इसके बाद विनीता नरुला ‘प्रसन्ना’ के कुशल संचालन में “होली और पकवान” विषय पर 36 सृजनकारों ने होली के पारंपरिक व्यंजनों—गुझिया, ठंडाई, कांजी, पूरनपोली, चकली, शकरपारे, पापड़ आदि—की खुशबू और स्वाद से भरी कविताओं द्वारा मंच को महका दिया।

अगले चरण में आशा बुटोला ‘सुप्रसन्ना’ के प्रवर्तन में रंग के दस पर्यायवाची शब्दों को समाहित करते हुए 35 रचनाकारों ने अपनी लेखनी से इंद्रधनुषी बौछार कर दी।

मंच की वरिष्ठ रचनाकार स्वर्णलता सोन ‘कोकिला’ के संयोजन में “बुरा न मानो होली है” को आधार बनाकर रासायनिक रंगों से खेली जाने वाली होली पर 33 रचनाकारों ने अपने संस्मरण साझा किए और क्षणिक मनोरंजन से होने वाले दुष्परिणामों पर अपने विचार व्यक्त किए।

पंचोत्सव के अंतिम दिवस विशेष शर्मा ‘सुहासिनी’ के कुशल संचालन में होली की संध्या पर एक आभासी काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें 18 रचनाकारों ने कविता, हास्य-व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं के साथ मंच की गरिमा बढ़ाई।

समूचे कार्यक्रम की सार्थक समीक्षा अशोक दोशी ‘दिवाकर’ द्वारा की गई तथा मंच के उपाध्यक्ष सुरेश जोशी ‘सहयोगी’ ने सभी आयोजन प्रभारियों और रचनाकारों को मार्गदर्शन प्रदान किया।

पंचदिवसीय रंगारंग कार्यक्रम में अशोक दोशी ‘दिवाकर’, फूलचंद्र विश्वकर्मा ‘भास्कर’, संजीव कुमार भटनागर ‘सजग’, विशेष शर्मा ‘सुहासिनी’ और सुरेश जोशी ‘सहयोगी’ ऐसे रचनाकार रहे जिन्होंने सभी आयोजनों में निरंतर सक्रिय सहभागिता कर कार्यक्रम को विशेष रूप से सफल बनाया।

प्रतियोगिता और प्रतिभागिता के लिए नीरजा शर्मा ‘अवनि’ और नीतू गर्ग ‘कमलिनी’ ने रचनात्मक पोस्टर, कोलाज और वीडियो बनाए, साथ ही अनुपम प्रशस्ति पत्रों के नवल रूप से रचनाकारों को सम्मान प्रदान किया, जो कार्यक्रम की गरिमा के अनुरूप थे। डॉ दवीना अमर ठकराल ‘देविका’के उद्बोधन ने रचनाकारों के लिए प्रेरणा और प्रोत्साहन का कार्य किया।

यह पंचदिवसीय रंगोत्सव साहित्य, संस्कृति और आपसी सद्भाव के रंगों से सराबोर एक यादगार आयोजन सिद्ध हुआ।