ध्रुव चरित्र का वर्णन सुन, झूम उठे श्रोता

* भक्त की दृढ़ता हो तो दर्शन को स्वयं चलकर आते हैं भगवान
* द्वादश अक्षरी मंत्र की शक्ति ने ध्रुव को बनाया 36 हजार वर्षों का राजा
पौली। ब्लॉक क्षेत्र के हरदौलिया स्थित श्री राम जानकी मंदिर ठाकुरद्वारा पर चल रहे श्रीमद् भागवत कथा में अवध धाम से आए आचार्य सत्येंद्र दास जी वेदांती ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि 12 अक्षरों के मंत्र
ओम नमो भगवते वासुदेवाय…. की शक्ति से 5 वर्षीय बालक ध्रुव आगे चलकर 36 हजार वर्षों तक राज किए।
              कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कथावाचक ने कहा कि विष्णु भक्त ध्रुव की अडिग दृढ़ता और तपस्या की कथा सुनाई। राजा उत्तानपाद के पांच वर्षीय पुत्र ध्रुव ने सौतेली माँ सुरुचि द्वारा अपमानित होने पर ईश्वर प्राप्ति हेतु जंगल में कठोर तपस्या की। प्रसन्न होकर भगवान नारायण ने उन्हें अमरता प्रदान की। जिससे वे आकाश में ध्रुव तारे के रूप में स्थापित हुए। ध्रुव अपने पिता की गोद में बैठना चाहते थे।सौतेली माँ ने उन्हें ‘नीच’ कहकर धिक्कारा और कहा कि वे केवल उनके गर्भ से जन्म लेकर ही पिता की गोद में बैठ सकते हैं। इस अपमान से दुखी होकर ध्रुव ने माता सुनीति के कहने पर ईश्वर की शरण ली।ध्रुव तपस्या के लिए जंगल जा रहे थे। तब नारद मुनि ने उन्हें
‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र की दीक्षा दी और भक्ति का मार्ग दिखाया। मात्र 5 वर्ष की आयु में ध्रुव ने मधुवन में 6 महीने तक भूखे-प्यासे,श्वास रोककर अविचल भाव से भगवान नारायण का ध्यान किया। उनकी अडिग भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और आशीर्वाद स्वरूप अटल राज्य के साथ-साथ आकाश में ध्रुव तारे के रूप में सर्वोच्च स्थान प्रदान किया। 12 अक्षरों के मंत्र में 36 हजार वर्षों के लिए राजा बना दिया। इस मौके पर परीक्षित स्वरूप उषा पाण्डेय,प्रेमचंद पाण्डेय,व्यास पीठ एवं कथा संयोजक वैदेही शरण जी,पंडित कृपा शंकर पाण्डेय,डॉ वी.के.पाण्डेय,प्रमोद पाण्डेय,प्रवीण पौरुष पाण्डेय,डॉ शिवेंद्र,प्रत्यूष,काव्या,ओम प्रकाश,चंद्रमौली,मनोज,विजय पाण्डेय समेत बहुत से लोग मौजूद रहे।