आयुष विश्वविद्यालय के शल्य तंत्र विभाग द्वारा बीएमडी जांच शिविर आयोजित।
कुरुक्षेत्र,(प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी) 6 मार्च : श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान के मार्गदर्शन में शल्य तंत्र विभाग द्वारा हड्डियों की जांच (बीएमडी) के लिए विशेष शिविर आयोजित किया गया। शिविर में विशेषज्ञों की टीम ने 90 से अधिक रोगियों की हड्डियों की जांच की। जांच के दौरान लगभग 50 रोगियों में ऑस्टियोपीनिया (हड्डियों की प्रारंभिक कमजोरी) पाया गया, 36 रोगियों की रिपोर्ट सामान्य आई, जबकि 2 से 3 रोगियों में ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों की गंभीर कमजोरी) की पुष्टि हुई।
संस्थान के विशेषज्ञों ने बताया कि यह समस्या मुख्यतः कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी, कम शारीरिक गतिविधि, बढ़ती उम्र, असंतुलित आहार और हार्मोनल बदलाव के कारण उत्पन्न होती है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो आगे चलकर यह स्थिति फ्रैक्चर, कमर दर्द, घुटनों में दर्द और चलने-फिरने में कठिनाई का कारण बन सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आयुर्वेद में हड्डियों को अस्थि धातु कहा गया है और इसकी कमजोरी को मुख्य रूप से वात दोष की वृद्धि से जोड़ा जाता है। आयुर्वेदिक उपचार पद्धति में इस रोग के लिए कई प्रभावी उपाय बताए गए हैं। अस्थि धातु को पोषण देने वाले औषध योग जैसे लाक्षादि गुग्गुलु, हड़जोड़ (अस्थि संहारक), प्रवाल पिष्टि और गोडंती भस्म का उपयोग चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार किया जा सकता है। बताया कि उपचार के साथ जीवनशैली में सुधार भी आवश्यक है। नियमित रूप से धूप लेना, कैल्शियम युक्त आहार जैसे दूध, तिल, हरी सब्जियां और बादाम का सेवन करना तथा हल्का व्यायाम और योग अपनाना हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होता है।