कप्तानगंज। समाजवादी पार्टी के कप्तानगंज कैंप कार्यालय पर सोमवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र के विधायक कवीन्द्र चौधरी, सपा जिलाध्यक्ष एवं सदर विधायक महेन्द्र नाथ यादव सहित पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा हाल ही में लागू हुए एसआईआर (सिंगल इलेक्टोरल रजिस्टर) से जुड़ी जमीनी दिक्कतें और आगामी बिहार चुनाव पर पार्टी की रणनीति रहा।
बैठक में विधायक कवीन्द्र चौधरी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि एसआईआर जैसे महत्वपूर्ण बदलाव को सरकार ने बिना पूरी तैयारी और जमीन पर तैनात कर्मियों के प्रशिक्षण के लागू कर दिया, जिससे अव्यवस्था फैल गई है। उन्होंने कहा कि नए सिस्टम को लागू करने के पहले व्यापक प्रशिक्षण, समयबद्ध कार्य योजना और तकनीकी सहायता की ज़रूरत थी, लेकिन सरकार ने जल्दबाज़ी में इसे जारी कर दिया, जिसका परिणाम है कि बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) फार्म भरने की प्रक्रिया तक समझ नहीं पा रहे हैं।
चौधरी ने बताया कि कई क्षेत्रों में मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया ठप है और बीएलओ लगातार भ्रमित हैं। “सरकार की जल्दबाज़ी का खामियाज़ा आम मतदाताओं को भुगतना पड़ेगा। मतदाता सूची में त्रुटियां आएंगी, नए वोटर छूट जाएंगे और पूरे चुनावी कार्य में अव्यवस्था पैदा होगी,” उन्होंने कहा। उन्होंने मांग की कि सरकार या तो एसआईआर प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण दे या फिलहाल इसे स्थगित करते हुए पुराने सिस्टम के जरिए कार्य सुनिश्चित करे।
सपा जिलाध्यक्ष एवं सदर विधायक महेंद्र नाथ यादव ने भी इस मुद्दे पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि सरकार को लोकतंत्र की मजबूती की बजाय सिर्फ प्रक्रिया थोपने की चिंता है। उन्होंने कहा कि सपा कार्यकर्ता मतदाताओं के हित में हर संभव सहयोग करेंगे, लेकिन इस तकनीकी बदलाव के लिए जमीनी तैयारी न होने से जनता और प्रशासन दोनों परेशान हैं।
बैठक में बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा की गई। नेताओं ने बताया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व स्तर पर लगातार विचार-विमर्श जारी है। सपा बिहार में गठबंधन, उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति पर गंभीरता से मंथन कर रही है। कवीन्द्र चौधरी ने कहा कि बिहार में बदलाव का माहौल है और समाजवादी विचारधारा को व्यापक समर्थन मिल सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि जल्द ही पार्टी की ओर से बिहार चुनाव पर औपचारिक घोषणा की जा सकती है।
बैठक के अंत में संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने, बीएलओ को मार्गदर्शन देने और जनता को जागरूक करने का संकल्प लिया गया। पदाधिकारियों ने कहा कि सपा लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेगी, चाहे सरकार कितनी भी बाधाएं क्यों न उत्पन्न करे।
यह बैठक न केवल प्रशासनिक खामियों को उजागर करने का माध्यम बनी, बल्कि आने वाले चुनावी परिदृश्य पर सपा की सक्रियता का संकेत भी दे गई।