प्यास मुद्दत की बुझानी है अभी।-विनोद उपाध्याय हर्षित

ग़ज़ल

कितनी दरिया में रवानी है अभी।
प्यास मुद्दत की बुझानी है अभी।।

ख़त्म किरदार हुआ जाता है।
क्यू अधूरी सी कहानी है अभी।।

इश्क़ का राज़ बताया है मगर।
और इक बात बतानी है अभी।।

सिर्फ़ बातों से नहीं भरता है पेट।
दूरी भी दिल की मिटानी है अभी।।

मेरी आंखों में ज़रा देखो तो।
प्यार की एक निशानी है अभी।।

आप यूं बैठ नहीं सकते हैं।
आप के पास जवानी है अभी।।

विनोद उपाध्याय हर्षित

9450558163

9307336601