पॉकेटमारों नेताओं को जेल भेजो

पॉकेटमारों नेताओं को जेल भेजो

 

किसने संसद भेज दिया पॉकेट मारो को

हम सच बोलने वाले लोग है बताओ सरकारों को

हम ने अपने पैर से ठोकर मारी है दरबारों को

पाई पाई लूटी है जनता के खून पसीने की

किसने संसद भेजा है पॉकेट मारो को

 

कुर्सी पर बैठे हैं जो, भूल गए वादों को

नोटों की गड्डी गिनते, बेच रहे फरियादों को

सवाल पूछे जो कोई, उसे कहते गद्दारों को

किसने संसद भेज दिया इन मक्कारों को

 

रोटी महँगी, सपना सस्ता, ये कैसा व्यापार है

नेता के घर दीवाली, जनता पर अंगार है

खाली जेबें, भारी टैक्स, बस यही दस्तूर है

किसने संसद भेज दिया इन दस्तूरों को

 

हम जागे हैं, अब जागेंगे सोई सरकारों को

वोट की ताकत से दिखलाएंगे हकदारों को

सिंहासन हिल जाएगा जब उठेगी ललकारों को

फिर न भेजेंगे संसद में हम पॉकेट मारो को

 

*जय हिन्द 🇮🇳*

 

*सर्वाधिक सुरक्षित अप्रकाशित मौलिक अधिकार रचनाएँ*

 

 

*अंतर्राष्ट्रीय*

*हास्य कवि व्यंग्यकार*

*अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी*

*सावनेर नागपुर महाराष्ट्र*