अन्याय के विरुद्ध संगठित संघर्ष ही सच्चा धर्म डॉ. श्री वत्साचार्य जी महाराज

 

भगवान परशुराम जयंती की पूर्व संध्या पर सनातन समाज पार्टी के संस्थापक ने दिया राष्ट्रोन्मुख संदेश

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। सनातन परंपरा के गौरवशाली पर्व भगवान परशुराम जयंती की पूर्व संध्या पर सनातन समाज पार्टी के संस्थापक डॉ. श्री वत्साचार्य जी महाराज ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए एक चिंतन-प्रेरक और राष्ट्रोन्मुख संदेश जारी किया है। डॉ. वत्साचार्य का यह संबोधन वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों में एक व्यापक वैचारिक विमर्श के रूप में सामने आया है, जिसमें उन्होंने धर्म-संस्थापन और सामाजिक न्याय पर विशेष बल दिया।
युगों-युगों तक धर्मरक्षा के प्रेरणास्रोत हैं भगवान परशुराम
अपने उद्बोधन में डॉ. वत्साचार्य ने कहा कि भगवान परशुराम केवल एक अवतार नहीं, बल्कि ज्ञान, तप और शौर्य के अप्रतिम समन्वय वाली सजीव चेतना हैं। उन्होंने स्मरण कराया कि सतयुग में अत्याचारी शासकों का उन्मूलन हो या त्रेतायुग में मर्यादा पुरुषोत्तम राम को दिव्य अस्त्र प्रदान करना, भगवान परशुराम ने हर युग में धर्मयुद्ध की दिशा को सशक्त किया है। द्वापर युग में भी अधर्म के विनाश के पीछे उनकी परोक्ष प्रेरणा सदैव विद्यमान रही। वर्तमान विसंगतियों पर जताई चिंता
समसामयिक परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि आज समाज नैतिक मूल्यों के ह्रास, राजनीतिक स्वार्थपरता और सामाजिक विभाजन जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “जब सत्ता जनसेवा के बजाय स्वार्थसिद्धि का साधन बन जाती है, तब समाज में असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है। ऐसे संक्रमणकाल में भगवान परशुराम के आदर्श और भी प्रासंगिक हो जाते हैं। अन्याय के समक्ष मौन रहना कायरता है।”
समरसता और न्यायपूर्ण राष्ट्र का संकल्प सनातन समाज पार्टी के लक्ष्यों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी एक ऐसे राष्ट्र के निर्माण के लिए संकल्पबद्ध है, जो जाति और वर्ग के भेदभाव से मुक्त हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति को समान सम्मान और अधिकार नहीं मिलते, तब तक वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना संभव नहीं है। उन्होंने राजनीतिक परिवर्तन के साथ-साथ वैचारिक और नैतिक परिवर्तन को भी अनिवार्य बताया। युवाओं से आह्वान: बनें समाज के सजग प्रहरी डॉ. वत्साचार्य ने युवा शक्ति को राष्ट्र की आधारशिला बताते हुए आह्वान किया कि युवा वर्ग जागरूक और राष्ट्रनिष्ठ बने। उन्होंने युवाओं को भगवान परशुराम के आदर्शों को आत्मसात कर भ्रष्टाचार और शोषण के विरुद्ध सजग प्रहरी बनने की प्रेरणा दी। संदेश के अंत में उन्होंने समस्त देशवासियों से धर्म, न्याय और समरसता पर आधारित नवीन भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लेने का आग्रह किया।