– डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने तत्परता दिखाते हुए मामले को लिये थे संज्ञान
कुदरहा। सीएचसी कुदरहा (बनहरा) में प्रसव के दौरान लापरवाही बरतने पर नवजात का सर धड़ से अलग होने के मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी के अगुवाई में अस्पताल के बगल संचालित हो रही मैक्स हॉस्पिटल में अनियमिकता मिलने पर टीम ने बुधवार को सील कर अस्पताल में कार्यरत सभी कर्मियों और एम्बुलेंस चालक से पूछताछ कर जानकारी हासिल की।
मुरादपुर गांव के रहने वाले दुर्गा प्रसाद ने सोमवार को पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर बताया की उनकी बहू प्रेमा को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर 8 अप्रेल को सुबह 8 बजे एम्बुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनहरा लेकर आए, जहां प्रसूता का एम्बुलेंस में ही इलाज शुरू कर दिया गया जिससे बच्चें का धड सिर से अलग हो गया, घबरा कर स्टाप नर्स कुसुम सिंह में प्रसूता को बगल के मैक्स हॉस्पिटल में भेज दिया, जहां से डिप लगा कर प्रसूता को ओपेक कैली अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां सर्जरी द्वारा बच्चें का सिर निकाला गया। यह खबर और एक्स के माध्यम से उप मुख्य मंत्री बृजेश पाठक के संज्ञान में लिया और संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य डॉक्टर सुशील कुमार की अगुआई में जाँच टीम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनहरा में भेजी, जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी राजीव निगम मंगलवार को दिन में 12:00 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गए और लगभग 2:00 बजे स्टेट जांच टीम भी स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। एंबुलेंस चालक से लेकर अस्पताल के सभी कर्मियों से जानकारी ली गई।
8 अप्रैल को ड्यूटी पर तैनात स्टाप नर्स कुसुम सिंह नें बताया की सुबह 8 बजे प्रसूता एम्बुलेंस से अस्पताल आयी,बताया गया की बच्चे का पैर लगभग एक घंटे पहले ही बाहर आ गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रसूता को कैली रेफर करने के लिए कागज बनाने मै अंदर आई ताकि उसी एम्बुलेंस से भेजा जा सके। जब में रेफर पत्र लेकर बाहर आयी तब तक प्रसूता के परिजन एम्बुलेंस खाली कर किसी प्राइवेट अस्पताल चले गए, फिर 13 तारीख को पता चल रहा है कि ऐसा आरोप लगाया गया है, जबकि प्रसूता हमारे लेबर रुम में आयी ही नहीं।
मुरादपुर की आशा मीरा देवी नें बताया कि प्रेमा का इलाज घटना के दो दिन पहले से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बगल में संचालित मैक्स हॉस्पिटल में चल रहा था, जहाँ पर कार्यरत डॉ सुनील नें बताया था कि बिना सर्जरी डिलेवरी नहीं हो पायेगी। घर पर जब स्थिति बिगड़ गई तो परिजन प्रसूता को मैक्स हॉस्पिटल ना लें जा कर उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लें आए और फिर किसी प्राइवेट अस्पताल लेकर चले गए।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जांच के बाद डॉक्टर सुशील कुमार बगल में चल रहे मैक्स हॉस्पिटल पर पहुंचे जहां लगभग 10 मरीज भर्ती थे लेकिन कोई भी डॉक्टर या स्टाफ नर्स मौजूद नहीं थी। लापरवाही बरतने पर अस्पताल को सील कर दिया गया है।
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