अयोध्या मे राम मंदिर निर्माण सांस्कृतिक उत्थान का प्रतीक: ब्रह्मर्षि डॉ. मोहन

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या l वैश्विक स्तर पर सेवा और आध्यात्म के माध्यम से युवाओं को नई दिशा देने का दावा, अयोध्या में जल्द शुरू होंगी समाजसेवा गतिविधियाँ
अयोध्या। ब्रह्मर्षि डॉ. मोहन ने अयोध्या प्रवास के दौरान विकास और धर्म से जुड़े मुद्दों पर विशेष बातचीत में कहा कि प्रभु श्रीराम का मंदिर निर्माण न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक उत्थान का भी प्रतीक है। उन्होंने इसे भारत की सनातन परंपरा और आस्था का पुनर्जागरण बताया।
हमारे संवाददाता से बातचीत में डॉ. मोहनजी ने कहा कि अयोध्या में आने वाले समय में विभिन्न प्रकार की समाजसेवा गतिविधियों की शुरुआत की जाएगी, जिससे स्थानीय लोगों और युवाओं को लाभ मिल सके।
उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य भारत की धर्म और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है। उनके अनुसार, उनके प्रयासों से लाखों युवा नशे और आपराधिक गतिविधियों से दूर होकर आध्यात्मिक मार्ग की ओर अग्रसर हुए हैं। आज देश-विदेश में बड़ी संख्या में युवा उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।
डॉ. मोहनजी का जीवन आध्यात्मिक साधना और निःस्वार्थ सेवा को समर्पित है। उन्होंने वर्ष 2003 में एक अंतरराष्ट्रीय संस्था की स्थापना की, जिसका मुख्यालय लंदन में स्थित है। इसी वर्ष भारत में एक धर्मार्थ ट्रस्ट की भी शुरुआत की गई। इसके अलावा वर्ष 2000 में स्थापित उनकी एक अन्य संस्था का मुख्यालय स्विट्जरलैंड में है।
उन्होंने बताया कि उनकी चैरिटी गतिविधियाँ 31 देशों में सक्रिय हैं, जबकि उनकी उपस्थिति 90 देशों तक फैली हुई है। उनकी संस्था वर्तमान में 22 देशों में औपचारिक रूप से पंजीकृत है।
वैश्विक स्तर पर उनके योगदान को कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है। इसी क्रम में अमेरिका के टेक्सास राज्य ने 16 अप्रैल को “मोहनजी डे” घोषित किया है, जो उनके कार्यों की अंतरराष्ट्रीय पहचान को दर्शाता है।
वर्तमान में डॉ. मोहनजी मुंबई के समीप तानसा नदी के किनारे गणेशपुरी में एक आश्रम का निर्माण कर रहे हैं। इसके अलावा उनके आश्रम स्कॉटलैंड, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, स्लोवेनिया, सर्बिया, क्रोएशिया और दक्षिण अफ्रीका सहित 14 से अधिक देशों में स्थापित हैं। डॉ. मोहन ने कहा कि उनका लक्ष्य सेवा, करुणा और आध्यात्म के माध्यम से मानवता के उत्थान के लिए निरंतर कार्य करना है।