हनुमानगढ़ी के महंत कमल दास महाराज ब्रह्मलीन, सरयू में दी गई जल समाधि

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। धर्मनगरी अयोध्या के प्रमुख सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ संत और महंत कमल दास महाराज का आकस्मिक निधन हो गया है। उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरी अयोध्या में शोक की लहर दौड़ गई। राम जन्मभूमि से लेकर सरयू तट तक हर आंख नम दिखी। शुक्रवार को साधु-संतों की पारंपरिक रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महाराज जी के पार्थिव शरीर को पतित पावनी मां सरयू की जलधारा में प्रवाहित कर जल समाधि दी गई। साधु परंपरा के अनुसार हुआ अंतिम संस्कार
महंत कमल दास जी के ब्रह्मलीन होने के पश्चात उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए हनुमानगढ़ी परिसर में रखा गया था, जहां हजारों की संख्या में भक्तों और साधु-संतों ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें नागा साधुओं की टोली भजन-कीर्तन करते हुए सरयू तट तक पहुंची साधु-संतों की उच्च परंपरा का निर्वहन करते हुए, उनके शरीर को फूलों से सजी नौका के माध्यम से सरयू के बीच जलधारा में ले जाया गया और पूर्ण विधि-विधान के साथ उन्हें जल समाधि दी गई। संत समाज में अपूरणीय क्षति हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ संतों ने महंत कमल दास को याद करते हुए कहा कि उनका जाना अयोध्या के संत समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।