प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत एंव धरोहर के संरक्षण, संवर्धन के लिए प्रदेश सरकार तत्पर 

प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत एंव धरोहर के संरक्षण, संवर्धन के लिए प्रदेश सरकार तत्पर

बहराइच 08 अप्रैल। उत्तर प्रदेश की पहचान इसकी समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली विरासत, उत्कृष्ट इतिहास और प्रगतिशील सोच से है। यह भूमि कला, साहित्य, संगीत और धर्म की महान विभूतियों की जन्मस्थली रही है। प्रदेश का संस्कृति विभाग समृद्ध इतिहास के संरक्षण, संवर्धन और विकास हेतु सतत् प्रयासरत है। ताकि इसकी बिरासत आने वाली पीड़ियों तक सुरक्षित रह सके।

प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के मार्गदर्शन में संस्कृत्ति विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा प्रदेश की मूर्त-अमूर्त सांस्कृतिक विरासत एवं धरोहरों को संरक्षित संवर्धित एवं जनमानस में प्रचारित-प्रसारित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। एडॉप्ट-ए-हेरिटेज नीति ‘‘अपनी धरोहर, अपनी पहचान’’ के अंतर्गत अभिरुचि की अभिव्यक्ति (म्व्प्) के माध्यम से अब तक 04 स्मारकों पर स्मारक मित्र के रूप में 05 वर्ष के लिए एम.ओ.यू. संपादित किया जा चुका है। प्रदेश सरकार प्रदेश की प्राचीन धरोहरों का बृहद अनुरक्षण कार्य भी करा रही है।

प्रदेश के लोक कलाकारों और उनकी प्रतिभा को देश दुनिया के समक्ष लाने के लिए संस्कृति विभाग द्वारा वृहद स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में जहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजनों की संख्या मात्र 415 थी वहीं, वर्तमान सरकार के कार्यकाल में हजारों कार्यक्रम प्रतिवर्ष आयोजित कराये जा रहे है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से पहले लगभग 300 कलाकारों द्वारा कार्यक्रमों में प्रतिभाग किया जाता था। 2017 के बाद श्उत्तर प्रदेश संस्कृति उत्सवश् के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में भी कलाकारों को खोज कर उनका पंजीकरण कराया गया। संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश की आर्टिस्ट डायरेक्टरी में अब तक कुल 9532 कलाकार दलों का पंजीकरण हो चुका है जिसमें लगभग 24,750 कलाकार पंजीकृत हो चुके हैं।

उत्तर प्रदेश धार्मिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक स्थलों सहित विभिन्न सांस्कृतिक महत्व का केन्द्र होने के कारण देश-विदेश के पर्यटक आकर्षित हो कर प्रदेश में आते है। वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश में कुल 01 अरब 56 करोड़़ से अधिक पर्यटक भ्रमण हेतु उत्तर प्रदेश में आकर पर्यटक स्थलों का भ्रमण किया है। उत्तर प्रदेश को घरेलू पर्यटक आगमन में देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।

प्रदेश सरकार महापुरूषों तथा राष्ट्रनायकों को युवा पीढ़ी से जोड़ने तथा सांस्कृतिक पुनरोत्थान का कार्य कर रही है, ताकि भावी पीढ़ी अपने महापुरूषों एवं राष्ट्रनिर्माताओं पर गर्व कर सकें। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल की स्थापना करते हुए तीन महापुरूषों, राष्ट्रनायकों की कांस्य प्रतिमा स्थापित की गयी है, जिसका उद्घाटन देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंन्द्र मोदी जी ने दिसम्बर, 2025 को किया है। प्रदेश सरकार ने कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले तीर्थ यात्रियों को 01 लाख रुपये प्रति श्रद्धालु अनुदान दिये जाने की व्यवस्था की है। गाजियाबाद में कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण किया गया है। सिंधी समाज के सिंधु दर्शन के तीर्थ यात्रियों के लिए 20 हजार रुपये प्रतियात्री अनुदान दिये जाने की व्यवस्था की गई है।

सरकार बुजुर्ग संतों, पुरोहितों एवं पुजारियों के लिए विशेष बोर्ड गठन की कार्यवाही कर रही है। श्री अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद, श्री देवीपाटन धाम तीर्थ विकास परिषद, ब्रज तीर्थ विकास परिषद, विंध्य धाम तीर्थ विकास परिषद, श्री चित्रकूट धाम तीर्थ एवं नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद, श्री शुक तीर्थ विकास परिषद का गठना किया गया है। जनपद सीतापुर के नैमिषारण्य में वेद विज्ञान केन्द्र की स्थापना भी कराया गया है। जनपद मिर्जापुर स्थित मां विन्ध्यवासिनी मन्दिर, मां अष्टभुजा मन्दिर व मां कालीखोह मन्दिर के परिक्रमा पथ के साथ मथुरा व संभल के तीर्थस्थलों को विकसित करने का कार्य गतिमान है।

श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण, अयोध्या दीपोत्सव, ब्रज रंगोत्सव, काशी की देव-दीपावली, नैमिष तीर्थ व शुक्र तीर्थ पुनरुद्धार, मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा का 100 साल बाद पुनः प्रतिष्ठापन तथा सोरों-सूकर क्षेत्र विकास आदि अद्भुत कार्य किये गये है। अयोध्या में दीपोत्सव के अवसर पर 17 से 19 अक्टूबर, 2025 को 26 लाख से अधिक दीप जलाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया है। काशी में देव दीपावली का आयोजन 03 से 05 नवम्बर 2025 को हुआ, जिसमें देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक वाराणसी आए। पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा बेस्ट टूरिज्म विलेज कम्पटीशन 2024 में हेरिटेज कैटेगरी में गांव पुरामहादेव, बागपत को पुरस्कृत किया गया है।

प्रदेश में वर्ष 2026-27 में एक लाख अतिरिक्त कमरे जोडने के उद्देश्य से ₹45 करोड़ का प्रावधान किया गया है। 2026-27 में 50,000 नए होम-स्टे कमरों का लक्ष्य रखा गया है। ब्रंाडेड् आपरेटरों को होम-स्टे पट्टे पर लेने की अनुमति दी जा रही है। स्थानीय रोजगार व महिला भागीदारी बढ़ाने हेतु महिला पर्यटक गाइडों का ₹10,000 लाइसेंस शुल्क माफ किया गया है। बेड एण्ड ब्रेकफास्ट योजना के अन्तर्गत भारतीय-विदेशी पर्यटकों को भारतीय परिवारों के साथ आवास-भोजन-की सुविधा सुलभ करायी जा रही है। इससे उन्हें भारतीय परम्पराओं एवं रीति-रिवाजों से परिचित कराया जा रहा है।

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