लखनऊ, विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेशभर की गौशालाओं में एक सप्ताह तक विशेष जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री Dharampal Singh ने विधान भवन स्थित अपने कार्यालय में विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते हुए निर्देश दिए कि 1 जून से 7 जून तक सभी गौशालाओं में स्वच्छता, गोसंवर्धन, पशु कल्याण और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। साथ ही दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिला पशुपालकों को सम्मानित कर अन्य महिलाओं को भी इस क्षेत्र से जोड़ने का प्रयास किया जाए।मंत्री ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लोगों को देशी गायों के पालन के लिए जागरूक किया जाए तथा उन्हें उपलब्ध सरकारी सुविधाओं की जानकारी दी जाए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत गोवंश पालन करने वाले किसानों और पशुपालकों को प्रति गोवंश प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अलावा चार निराश्रित गोवंशों का पालन करने वाले किसानों को 72 हजार रुपये की सहायता चार किश्तों में उपलब्ध कराई जाएगी। पशुओं के सुरक्षित संरक्षण के लिए मनरेगा के माध्यम से पशु आश्रय शेडों का निर्माण भी कराया जाएगा।बैठक में मंत्री ने सभी गौशालाओं में विशेष स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गोवंशों के लिए भूसा, हरा चारा, साइलेज और स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही गौशालाओं और उनके आसपास वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जाए तथा पशुओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जाए। उन्होंने पशुओं के टीकाकरण कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए सूक्ष्म कार्ययोजना तैयार कर लक्ष्य के अनुरूप कार्य करने पर बल दिया।धर्मपाल सिंह ने कहा कि इस अभियान को जनभागीदारी से जोड़कर जनआंदोलन का रूप दिया जाए। इसके लिए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी, पशुधन प्रसार अधिकारी, ब्लॉक प्रमुख, ग्राम प्रधान और अन्य जनप्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए। अभियान के दौरान पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, गोसंवर्धन और पशु स्वास्थ्य के प्रति व्यापक जनजागरूकता पैदा करने के लिए प्रभावी प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन जनपदों में भूसा संग्रहण का लक्ष्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है, उन्हें चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही जहां गोचर भूमि अब तक अतिक्रमण मुक्त नहीं कराई गई है, वहां जिलाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावी कदम उठाए जाएं। मंत्री ने दुग्ध उत्पादकों को समयबद्ध ढंग से दुग्ध मूल्य का भुगतान सुनिश्चित करने और प्रत्येक गांव में दुग्ध समितियों के गठन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए।बैठक में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में चलाए गए भूसा संग्रहण अभियान के तहत उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। निर्धारित 1 करोड़ 37 लाख 42 हजार 18 कुंतल लक्ष्य के मुकाबले 1 करोड़ 36 लाख 98 हजार 441 कुंतल भूसा उपलब्ध कराया जा चुका है, जो लक्ष्य का 99.70 प्रतिशत है। इसमें 14 लाख 81 हजार 71 कुंतल भूसा दान के माध्यम से तथा 1 करोड़ 22 लाख 17 हजार 369 कुंतल भूसा क्रय कर एकत्र किया गया है। भूसे के सुरक्षित भंडारण के लिए प्रदेश में 3,974 अस्थायी तथा 7,285 स्थायी भूसा बैंक स्थापित किए गए हैं।बैठक में राज्यमंत्री Krishna Paswan ने निराश्रित गोवंशों के संरक्षण, पशुपालकों को समय पर भुगतान तथा दुग्ध समितियों के विस्तार से संबंधित सुझाव दिए। वहीं अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने विभागीय योजनाओं की प्रगति से अवगत कराते हुए मंत्री के निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने मंडलवार भूसा प्रबंधन, हरे चारे की बुआई, संचारी रोग नियंत्रण, टीकाकरण और दुग्ध समितियों के गठन को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।सरकार का मानना है कि दुग्ध उत्पादन, पशुपालन और गोसंवर्धन को बढ़ावा देकर न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जा सकता है, बल्कि किसानों और पशुपालकों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की जा सकती है।