मुण्डेरवा गन्ना समिति की बैठक हंगामे की भेंट, किसानों का जोरदार विरोध
फंड जारी न होने पर भड़के किसान, सचिव के जवाब से असंतोष
बिना निर्णय स्थगित हुई बैठक, समस्याओं के समाधान तक बहिष्कार की चेतावनी
जितेन्द्र पाठक
मुण्डेरवा, बस्ती (8 अप्रैल 2026):
सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड मुण्डेरवा-बस्ती की प्रबंध कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को खाद गोदाम परिसर में गन्ना समिति अध्यक्ष किसान सुरेंद्र राय की अध्यक्षता में आयोजित की गई, लेकिन किसानों के तीव्र विरोध और हंगामे के चलते बैठक को बीच में ही स्थगित करना पड़ा।
बैठक की शुरुआत पेराई सत्र 2025-26 की समीक्षा और किसानों की समस्याओं पर चर्चा के साथ हुई। इसके साथ ही आगामी पेराई सत्र 2026-27 की तैयारियों, प्रस्तावित बजट एवं खर्चों पर विचार-विमर्श और पुरानी ऑडिट आपत्तियों के निस्तारण जैसे अहम मुद्दे एजेंडे में शामिल थे।

इसी दौरान गन्ना विकास स्कूल के जिर्णोद्धार एवं रखरखाव के लिए मिलने वाली धनराशि को रोके जाने का मुद्दा उठ खड़ा हुआ। किसानों ने आरोप लगाया कि समिति के सचिव रामफल द्वारा फंड जारी नहीं किया जा रहा है। सचिव के जवाब से असंतुष्ट किसानों ने विरोध शुरू कर दिया, जो जल्द ही हंगामे में बदल गया।
नाराज किसानों और समिति सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार करते हुए स्पष्ट कहा कि जब तक लंबित समस्याओं का समाधान नहीं किया जाएगा, तब तक किसी भी बैठक का कोई औचित्य नहीं है। स्थिति बिगड़ते देख बैठक को स्थगित कर दिया गया। किसानों ने तत्काल धनराशि जारी करने की मांग भी उठाई।
बैठक में संतकबीरनगर और बस्ती जिले के किसान व समिति पदाधिकारी मौजूद रहे। सचिव द्वारा जारी पत्रांक 827/8 दिनांक 17-03-2026 के अनुसार, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक, मुख्य गन्ना प्रबंधक (चीनी मिल मुण्डेरवा), उप महाप्रबंधक गन्ना, जिला गन्ना अधिकारी बस्ती एवं उप गन्ना आयुक्त (पूर्वी क्षेत्र, गोरखपुर) को भी आमंत्रित किया गया था।
बैठक में यह प्रस्ताव भी रखा गया कि जिन मामलों में अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं या नष्ट हो चुके हैं, उनके लिए एनओसीआर प्रक्रिया अपनाकर संबंधित धनराशि को बट्टे खाते में डाला जाए।
इस दौरान अध्यक्ष सुरेंद्र राय, सचिव रामफल, डायरेक्टर महेंद्र पाल, पूर्व उपाध्यक्ष विश्वजीत पाल, फूलचंद पटेल, सुमिरन चौधरी, यशोदा नंद यादव, प्रधान राम दुलारे, प्रधान प्रतिनिधि रमजान, योगेंद्र सिंह और विनोद राय सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि किसानों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों के चलते इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा था, लेकिन हंगामे के कारण कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका।