श्री राम कथा के रसपान से निहाल हुए श्रद्धालु, भक्तिमय हुआ वातावरण

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। दशरथ के राजमहल (बड़ा स्थान) में श्री राम जन्मोत्सव के पावन अवसर पर भव्य ‘श्री राम कथा’ का आयोजन किया गया। जगतगुरु स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य महाराज की अध्यक्षता एवं उनके प्रिय शिष्य मंगल भवन पीठाधीश्वर अर्जुन द्वाराचार्य स्वामी कृपालु राम भूषण दास महाराज के सानिध्य में आयोजित इस कथा में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा का मुख्य सार कथा व्यास स्वामी नरहरि दास महाराज (भक्तमाल) ने अपने मुखारविंद से भगवान श्री राम के बाल स्वरूप और उनकी लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा बाल लीला जब प्रभु श्री राम मणिमय आंगन में अपनी ही परछाई को पकड़ने के लिए दौड़ते हैं, तो वह दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है। माता कौशल्या प्रभु की इन बाल सुलभ चेष्टाओं को देखकर आनंदित होती हैं। आभूषणों की शोभा महाराज जी ने बताया कि राम जी से आभूषणों की शोभा बढ़ती है, न कि आभूषणों से राम जी की। माता जानकी का प्राकट्य कथा के दौरान जनक नंदिनी माता सीता के प्राकट्य प्रसंग को सुनकर श्रोता भाव-विभोर हो गए। जैसे ही “दूध मति गंगा” के तट पर हल चलाने से माता जानकी प्रकट हुईं, पूरा पांडाल जयकारों से गूंज उठा।
विशिष्ट संतों की गरिमामयी उपस्थिति इस अवसर पर अयोध्या के विभिन्न मठ-मंदिरों के प्रमुख संत उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से
महंत राम शरण दास महाराज
आचार्य पंडित विष्णु प्रसाद नायक शास्त्री महंत बृजमोहन दास महाराज (श्रीपुंज मंदिर)
स्वामी संतोष दास महाराज (संकादिक आश्रम) स्वामी हनुमान दास महाराज (छोटी जगह) कार्यक्रम के अंत में उपस्थित भक्तों ने आरती में भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया। कथा के दौरान सुमधुर भजनों पर भक्त झूमते नजर आए, जिससे पूरा वातावरण राममय हो गया।