विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए शिक्षा में नवाचार मोटिवेशन नितांत आवश्यक : डॉ. आर सी अग्रवाल

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए शिक्षा में नवाचार मोटिवेशन नितांत आवश्यक : डॉ. आर सी अग्रवाल

-स्किल जीवन में कभी व्यर्थ नहीं होती : डॉ. बिजेंद्र सिंह

अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कौटिल्य प्रशासनिक भवन सभागार में गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी के मुख्य वक्ता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएसएआर) नई दिल्ली के पूर्व उप महानिदेशक एवं प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर सी अग्रवाल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह ने स्वागत एवं स्मृति भेंट कर किया। शिक्षकों को संबोधित करते हुए डॉ. आरसी अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पाठ्यक्रम को बहुविषयक शिक्षा के तहत कृषि को अन्य विज्ञानों और प्रबंधन के साथ जोड़कर पढ़ने का अवसर है। इससे भारत की शिक्षा प्रणाली में बड़ा सुधार होगा। डिग्री प्रोग्राम्स में ’हैंड्स-ऑन’ ट्रेनिंग और इंटर्नशिप को अनिवार्य बनाने पर जोर दिया ताकि स्नातक सीधे रोजगार पाने या स्टार्टअप शुरू करने के योग्य बनें। बौद्धिक संपदा और पादप किस्म संरक्षण (पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण) के रूप में उन्होंने किसानों के अधिकारों और नई पौधों की किस्मों के पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाए जाने पर जोर दिया। डॉ. अग्रवाल ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि शिक्षा में नवाचार को सबसे बड़ा हथियार बताया है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि छोटे और मध्यम किसानों को अवसर दिया जाए क्योंकि उनके पास अच्छे विचार हैं जो विकसित भारत के लिए सुखद सिद्ध होंगे। युवा छात्रों को प्रेरित करने के लिए डॉ. अग्रवाल ने कहा कि छात्रों में मोटिवेशन की बेहद आवश्यकता है इससे उनके करियर में सुधार के साथ-साथ आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी और रिसर्च गतिविधियों में भी सहयोग मिल पाएगा। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान विज्ञान संस्थानों में भी बहुविषयक पाठ्यक्रम पर जोड़ दिया जा रहा है। इसके उत्साह जनक परिणाम आ रहे हैं। संगोष्ठी के अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति में बहु विषयक शिक्षा भविष्य की शिक्षा है। इससे शोध गतिविधियों को आधार मिलेगा। नई शिक्षा नीति में एंटरप्रेन्योर को बढ़ावा देने के लिए कई उपबंध किए गए हैं। छात्र-छात्राओं को मोटिवेट कर उन्हें स्किल्ड बेस तैयार करना होगा। कुलपति ने कहा कि बच्चों को नंबर लाने की मशीन नहीं बनाना है। बल्कि उन्हें प्रतियोगिता के क्षेत्र में ब्रेन का उपयोग करने के लिए तैयार करना है। उन्होंने कहा कि स्किल जीवन में बेकार नहीं जाती इसके लिए हॉलिस्टिक डेवलपमेंट पर ध्यान देना होगा। गोष्ठी में धन्यवाद एवं आभार ज्ञापन कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने किया। उन्होंने कहा की विकसित भारत 2047 को आगे बढ़ने का संकल्प का दायित्व शिक्षकों का है। इसमें सब को साथ लेकर चलने का अवसर है।

इस अवसर पर प्रो. एस एस मिश्र प्रो. आशुतोष सिन्हा, प्रो. शैलेंद्र कुमार वर्मा, प्रो. फर्रुख जमाल, प्रो. सी के मिश्र, प्रो नीलम पाठक, प्रो. अनूप कुमार, प्रो. शैलेंद्र कुमार, प्रो तुहिना वर्मा, डॉ. विनोद कुमार चौधरी, डॉ गीतिका श्रीवास्तव, डॉ संजय चौधरी, इं विनय कुमार सिंह, इं आरके सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।