संत देवेश दास व नीरज दास अयोध्या हनुमानगढ़ी के पुजारी नियुक्त

-सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी की सागरिया पट्टी की पंचायती बैठक में दो युवा संतों को हनुमानजी की सेवा-पूजा का सौंपा गया
अयोध्या। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी की सागरिया पट्टी की पंचायती बैठक में दो युवा संतों को हनुमानजी महाराज की सेवा-पूजा का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया। बैठक में सर्वसम्मति से संत देवेश दास शिष्य महंत संत दास और नीरज दास शिष्य जमुना दास को हनुमानगढ़ी का पुजारी नियुक्त किया गया। यह बैठक धर्मसम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें पट्टी के सैकड़ों नागा संत उपस्थित रहे। परंपरा के अनुसार पुजारपना की यह व्यवस्था समयावधि के आधार पर क्रम से चलती है। सागरिया पट्टी की निर्धारित अवधि पर आयोजित इस पंचायती बैठक में सभी नागा संतों ने महंत संत दास महाराज के शिष्य देवेश दास तथा महंत जमुना दास महाराज के शिष्य नीरज दास को हनुमानजी महाराज की सेवा-पूजन का दायित्व सौंपने का निर्णय लिया।नवनियुक्त दोनों पुजारियों को श्री हनुमानजी महाराज के समक्ष ले जाकर दंडवत कराया गया और महावीरी से उनका अभिषेक कराकर सेवा कार्य का दायित्व ग्रहण कराया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए धर्मसम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज ने बताया कि  हनुमानगढ़ी श्रीपंच रामानंदी निर्वाणी अखाड़ा की प्रधान पीठ है और यहां के संत त्याग, तपस्या तथा धर्मरक्षा की परंपरा के प्रतीक हैं।उन्होंने संतों को अनुशासन का स्मरण कराते हुए कहा कि कभी-कभी कुछ संत सायंकालीन स्नान के बाद बिना तिलक लगाए आश्रम से बाहर निकल जाते हैं, जो उचित नहीं है। तिलक संतों की पहचान है और यह बताता है कि हम हनुमानगढ़ी के संत हैं। पीठ की मर्यादाओं और सिद्धांतों का पालन ही संतों के सम्मान और प्रतिष्ठा का आधार है। अखाड़े के सभी नियम आचार्यों द्वारा संतों की गरिमा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।
बैठक के अंत में धर्मसम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज के उत्तराधिकारी तथा संकटमोचन सेना के अध्यक्ष महंत संजय दास महाराज ने उपस्थित सभी संतों के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं श्री हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज के उत्तराधिकारी, हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डॉ. महेश दास महाराज और श्रृंगी ऋषि आश्रम पीठाधीश्वर महंत वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास ने परंपरागत रीति से सभी का स्वागत किया।बैठक में तीनों अनियों के पूर्व प्रधानमंत्री महंत माधव दास, बाबा सरोज दास, बाबा रामप्रसाद दास, महंत बलराम दास, इंद्रदेव दास पहलवान, नागा रामदास, महंत सुरेंद्र दास, बाबा लक्ष्मण दास, विवेक दास, सरवन दास, पुजारी अनिल दास, अंबिका दास, मोहन दास, अंकित दास सहित अनेक संत उपस्थित रहे।