जब-जब आँख में आँसू आए, तब-तब लब ज्यादा मुस्काए

जब-जब आँख में आँसू आए
तब-तब लब ज्यादा मुस्काए

नहीं संभाला उसने आकर
हम ठोकर खाकर पछताए

कितने भोलेपन में हमने
इक पत्थर पे फूल चढाए

चाहत के संदेसों संग अब
रोज कबूतर कौन उडाए

नाम किसी का अपने दिल पर
कौन लिखे और कौन मिटाए

वो था इक खाली पैमाना
देख जिसे मयक़श ललचाए

आज बना लो अपना बेहतर
कल जाने क्या क्या हो जाये

कुछ तो दुनियादारी सीखो
कौन ‘किरण’ तुमको समझाए
©डॉ कविता ‘किरण’✍️