लखनऊ, । लाल बहादुर शास्त्री भवन (एनेक्सी) में चिकित्सा शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश के नियंत्रणाधीन स्थापित संस्था प्रोमोट फार्मा काउंसिल और छप्च्म्त्, रायबरेली के बीच आपसी सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा विभाग पार्थ सारथी सेन शर्मा, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, केवी राजू, डॉ. जीएन सिंह और छप्च्म्त् की निदेशक सुभिनी ए. सराफ सहित कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे।प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कहा कि इस एमओयू से प्रदेश को दवाओं और मेडिकल उपकरणों के निर्माण, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के क्षेत्र में ठोस लाभ प्राप्त होंगे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को फार्मा, बायोटेक और मेड-टेक क्षेत्र में अग्रणी बनाना है।मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह सहयोग केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि परिवर्तनकारी सिद्ध होगा। छप्च्म्त् के साथ साझेदारी से राज्य में स्किलिंग प्रोग्राम, रेगुलेटरी साइंस इनिशिएटिव्स और अनुसंधान-नवाचार गतिविधियों को गति मिलेगी। इसका प्रभाव प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने में दिखाई देगा।सलाहकार (स्वास्थ्य) डॉ. जीएन सिंह ने कहा कि इस एमओयू के तहत रेगुलेटरी साइंस और क्वालिटी एक्सीलेंस सेंटर की स्थापना, बायोसिमिलर अनुसंधान, किफायती मेडिकल डिवाइस निर्माण और स्टार्टअप इकोसिस्टम के विकास पर विशेष बल दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इससे उत्तर प्रदेश न केवल निर्माण केंद्र बल्कि ज्ञान और नवाचार का हब बनेगा।इस समझौते के तहत एक संयुक्त कार्यदल गठित किया जाएगा, जो अगले एक माह में 2-3 प्रमुख परियोजनाओं की पहचान करेगा और आगामी तीन माह में इन पर कार्यवाही प्रारम्भ कर दी जाएगी। छप्च्म्त् के सहयोग से प्रतिवर्ष 500 से अधिक छात्रों और पेशेवरों को फार्मा अनुसंधान, रेगुलेटरी अफेयर्स और इंडस्ट्रियल बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में प्रशिक्षित किया जाएगा।प्रबंध निदेशक प्रोमोट फार्मा कृतिका शर्मा ने उपस्थित लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि प्रोमोट फार्मा प्रदेश को वन ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है और यह एमओयू इस दिशा में और बल प्रदान करेगा।