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लखनऊ): 08 अगस्त, 2025उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने वाराणसी में स्थित विश्वप्रसिद्ध बौद्ध स्थल सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया को तीव्र गति से आगे बढ़ा दिया है। इस संबंध में आज लखनऊ के पर्यटन निदेशालय में पर्यटन विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक संयुक्त बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी सितंबर माह में होने वाली यूनेस्को की बैठक के एजेंडे और प्रस्तावित कार्ययोजना पर गहन चर्चा हुई।उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सारनाथ हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है। इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल सूची में शामिल किया जाना न केवल भारत की वैश्विक विरासत को समृद्ध करेगा, बल्कि इससे पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक संरक्षण को भी बल मिलेगा। उन्होंने पर्यटन एवं पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को इस दिशा में किए गए प्रयासों के लिए बधाई दी। मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में तीन विश्व धरोहर स्थल — ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी — हैं, जो सभी आगरा में स्थित हैं। सारनाथ के सूची में शामिल होने से उत्तर प्रदेश पर्यटन के विश्व मानचित्र पर नए आयाम स्थापित करेगा, जो प्रदेश के लिए गर्व की बात होगी।बैठक के बाद एएसआई के वरिष्ठ अधिकारी मंत्री जयवीर सिंह से मिले और अब तक की प्रगति एवं आगे की रणनीति पर चर्चा की। भारत ने 2025-26 के नामांकन चक्र में सारनाथ को आधिकारिक रूप से यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची के लिए नामांकित किया है।प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम और एएसआई के अधिकारियों ने सारनाथ के पारिस्थितिकी, सतत पर्यटन विकास और इको टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। वाराणसी में स्थानीय स्टेकहोल्डर्स और समुदाय के साथ एक बैठक आयोजित करने पर भी सहमति बनी।प्रमुख सचिव पर्यटन ने बताया कि पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सारनाथ को कपिलवस्तु, श्रावस्ती, संकीसा, कुशीनगर और कौशांबी जैसे अन्य बौद्ध स्थलों से बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान की गई है। वाराणसी और कुशीनगर एयरपोर्ट की व्यवस्था विदेशी पर्यटकों के लिए सुविधा बढ़ाने के लिए की गई है। नेपाल से सटे होने के कारण भी बड़ी संख्या में बौद्ध श्रद्धालु वाराणसी आते हैं।भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक यदुवीर सिंह रावत और अतिरिक्त महानिदेशक जाह्नवीज शर्मा ने भी बैठक में अपनी टिप्पणियां दीं और आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में किसी स्थल को शामिल करने के लिए वहां की मानव रचनात्मक प्रतिभा, प्रौद्योगिकी या वास्तुकला के विकास की कहानी, और मानव इतिहास के महत्वपूर्ण चरणों का प्रतिनिधित्व करने जैसे कई मानदंडों को पूरा करना आवश्यक होता है। स्थल को पहले अस्थायी सूची में और बाद में स्थायी सूची में शामिल किया जाता है।इस महत्वपूर्ण बैठक में विशेष सचिव पर्यटन ईशा प्रिया, निदेशक पर्यटन (इको) प्रखर मिश्रा, लखनऊ एएसआई प्रभारी आफताब हुसैन सहित पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।