अयोध्या में सद्गुरु कबीर साहब की 627वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई, एकता और आध्यात्मिक चेतना पर जोर

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या । ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि, बुधवार को सद्गुरु कबीर साहब की 627वीं जयंती समारोह अयोध्या के जियनपुर मोहबरा बाजार स्थित चूड़ामणि चौराहा पर, श्री कबीर धर्म मंदिर सेवा समिति द्वारा कबीर मठ जियनपुर में बड़े ही श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर संत श्री परीक्षा साहेब ने समारोह की अध्यक्षता की। कबीर ज्ञान, नाम, आचार्य: अद्भुत और अनोखे महापुरुष अध्यक्षता करते हुए संशोधित महंत उमाशंकर दास, परीक्षा साहेब ने बताया कि कबीर ज्ञान, नाम, आचार्य की अद्भुत और अनोखे महापुरुष थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जाति, पाति, धर्म और पंथ को मानने वाला व्यक्ति कबीर साहब को कभी समझ नहीं पाएगा। महाराज जी ने बताया कि हिंदू, जैन, बौद्ध, ईसाई, मुस्लिम ये सब धर्म नहीं, बल्कि पंथ हैं जो किसी व्यक्ति द्वारा बनाए गए हैं। सच्चा धर्म वह है जो चेतना के द्वारा सत्य और असत्य का परख करता हो। कबीर साहब ने कहा था, “भाई रे दुई जगदीश कहां…”, जिसका तात्पर्य है कि परमात्मा एक है और जो चेतना के द्वारा सही और गलत की परख करते हैं, वही सच्चे हैं। सदगुरु कबीर ने समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में भी कबीर दास जी ने जो कहा वह आज सत्य हो रहा है और इस बात पर चर्चा करने की आवश्यकता है कि गुरु कबीर एक विरक्त संत थे। समाज सुधारक और निर्गुण निराकार भक्ति के प्रतीक
मुख्य अतिथि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने सद्गुरु कबीर दास जी महाराज को एक महान समाज सुधारक बताया। उन्होंने कहा कि कबीर दास की भक्ति निर्गुण निराकार की भक्ति है जो हमारी आत्मा में बसी है और इसी भक्ति का नाम आध्यात्म है। चम्पत राय ने जोर दिया कि कबीर दास जी का जन्म हिन्दू या मुस्लिम में हुआ यह चर्चा का विषय नहीं है, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात करने की जरूरत है। उन्होंने याद दिलाया कि कबीर दास का जन्म भक्ति काल में हुआ और उसी समय जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी महाराज ने कहा था, “जाति पाति पूछय न कोई हरि को भजैय सो हरि का होई।”
मानव एकता के पैरोकार और भ्रम जाल से मुक्ति का संदेश
विश्व कबीर विचार मंच के प्रदेश अध्यक्ष संत उमाशंकर दास ने कहा कि सदगुरु कबीर मानव एकता के पैरोकार थे और उन्होंने भ्रम जाल से मुक्ति पाने का संदेश दिया। श्री दास ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश में कबीर पंथियों की लगभग 60 प्रतिशत आबादी है, जो करीब 22 करोड़ होती है, और कबीर पंथ के साधु संत अपनी भागीदारी को लेकर एकजुट होने की बात कर रहे हैं।
कार्यक्रम का सफल संचालन और उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
कार्यक्रम का संचालन सरल दास ने किया, जबकि धर्म प्रकाश दास, अचिन्त दास और दु:खशमन दास ने संयोजन का कार्य संभाला। इस अवसर पर संत निहाल साहेब (कबीर न्याय मंदिर गोण्डा), बनवारी पति ब्रह्मचारी (संत रविदास मंदिर अयोध्या), संत निर्मल साहेब (बिहार), संत विकास साहेब (कौशांबी), संत राम साहेब (कौशांबी), संत विचार साहेब (कबीर आश्रम शेरवा घाट अयोध्या), संत प्रकाश साहब (अंबेडकरनगर), संत विनय शरण साहेब, संत विवेक ब्रह्मचारी, छत्तीसगढ़ आश्रम के महंत रामेश्वर दास, डॉ अनिल सिंह, संत शील दास सहित दर्जनों वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।
इस पावन अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राजित राम पटेल, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष एवं पूर्व किसान मोर्चा अध्यक्ष भाजपा रामचंद्र वर्मा, उमाशंकर सिंह, ज्ञानचंद वर्मा, डॉ अवधेश वर्मा सहित सैकड़ों की संख्या में संत और भक्तजन उपस्थित रहे।