

अनुराग लक्ष्य, 6 जून
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
ईद के अवसर पर मैं अक्सर यह शेर कहता था कि,
आई है ईद दिल में उमंगें लिए हुए,
खुशियों की मीठी मीठी तरंगें लिए हुए,
चाहत की डोर थामे चलो आसमाँ में हम,
उड़ जाएं उल्फ़तों की पतंगें लिए हुए,,
लेकिन आज की शाम बकरा ईद की शाम है। छाया चित्र से यह साफ अंदाज़ा लगा सकते हैं कि मुंबई जैसी आर्थिक नगरी में दुकानदारों का क्या हाल है।
न सड़कों पर कोई चहल पहल और न ही दुकानदारों की दुकानों पर खरीदारों की भीड़। यह साकार रात 8/30 बजे का है। इसकी लिखते समय मुझे भी बहुत आश्चर्य हो रहा है कि आखिर ऐसा क्यों। इस बाबत कुछ बड़े कपड़े के दुकानदारों से बात चीत भी हुई।
सलीम अंसारी, ,,,, बरसों से थोक में होजरी का कारोबार करने वाले सलीम अंसारी कहते हैं कि यह समझ से बाहर है कि दुकानदारी इतनी बेहाल क्यों है। यही ईद के मौके पर भी था। मेरा बहुत सारा माल बचा रह गया। ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाया, और मेरा लाखों का नुकसान हुआ।
वाहिद अंसारी,,,, धारावी की चर्चित दुकान वारिस फैशन के प्रोप्राइटर वाहिद अंसारी आज की शाम को लेकर बहुत अफसोस करते हुए कहते हैं कि पता नहीं कौन सी हवा चल रही है कि ईद और बकरा ईद के मौके पर भी दुकानदारी बिलकुल ज़ीरो है। किसको दोषी ठहराया जाए। इस मंहगाई को या अपनी किस्मत को। अगर यही मंदी का दौर चलता रहा तो सच में एक दिन ऐसा आयेगा कि मुंबई से बोरिया बिस्तर बांध कर अपने शहर सुल्तानपुर चला जाऊंगा।
इसी तरह मुंबई के अन्य भीड़ भाड़ वाले इलाके में भी देखी गई, जहां दुकानदारों के चेहरे मायूसी में डूबे हुए हैं।