ग़ज़ल ©डॉ कविता”किरण”
क्या बताऊँ मुझे हुआ क्या है
क्या मरज है,मिली दवा क्या है
नींद मेरी उड़ा के मुझ से ही
पूछते हो ये रतजगा क्या है
बेवफ़ाओं के सरगना हो तुम
तुमको मालूम क्या वफ़ा क्या है
आ मुहब्बत से अब गले मिल ले
नफ़रतों में भला रखा क्या है
इश्क़ कहते हैं ऐ “किरण” जिसको
अब ही जाना कि ये बला क्या है
©डॉ कविता “किरण”