मण्डलायुक्त लखनऊ मण्डल और नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देश पर नगर निगम और प्रशासन ने गुरुवार को शहर के दो अलग-अलग इलाकों में अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए कुल 0.311 हेक्टेयर (करीब 3,100 वर्गमीटर) सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया। इन दोनों अभियानों में मुक्त कराई गई जमीन की बाजारू कीमत लगभग 3.5 करोड़ रुपये आंकी गई है।
पहली कार्रवाई सरोजनी नगर तहसील के ग्राम सेंवई में हुई, जहां नगर निगम की संपत्ति मानी जा रही गाटा संख्या 840, 841, 842 और 843 की बंजर भूमि पर कुछ प्रॉपर्टी डीलरों ने अवैध प्लाटिंग शुरू कर दी थी। पिलर और जाली लगाकर कब्जा मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा था। नगर निगम और तहसील प्रशासन की संयुक्त टीम ने जेसीबी मशीनों की मदद से मौके पर पहुंचे और अवैध निर्माणों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई का नेतृत्व नायब तहसीलदार रत्नेश कुमार ने किया, जबकि नगर निगम की ओर से सम्पत्ति प्रभारी संजय यादव और राजस्व विभाग के लेखपालों ने समन्वय किया। मौके पर सुशांत गोल्फ सिटी थाने की पुलिस, पीएसी और नगर निगम की ईटीएफ टीम भी मौजूद रही। यहां मुक्त कराई गई भूमि की कीमत करीब 2.5 करोड़ रुपये आंकी गई है।दूसरी बड़ी कार्रवाई ग्राम लोनापुर में हुई, जहां खसरा संख्या 219 (चकमार्ग) और 169 (नाली) की भूमि पर वर्षों से स्थानीय लोगों और कुछ दलालों द्वारा अवैध कब्जा किया गया था। यहां प्लाटिंग के साथ-साथ अस्थाई बाउंड्री वॉल्स भी बना दिए गए थे। नायब तहसीलदार नीरज कटियार के नेतृत्व में नगर निगम और प्रवर्तन दल ने मिलकर कब्जा हटवाया। इस दौरान नगर निगम के लेखपाल सुभाष कौशल और आशुतोष समेत बीबीडी थाना पुलिस बल ने सहयोग किया। यहां मुक्त कराई गई भूमि की कीमत करीब 1 करोड़ रुपये आंकी गई है।कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध करने की कोशिश भी की, लेकिन पुलिस बल की मौजूदगी और प्रशासनिक सूझबूझ से दोनों जगह अभियान शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ। नगर निगम के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी इस तरह की सख्त कार्रवाइयाँ जारी रहेंगी।इन कार्रवाइयों के जरिए प्रशासन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि लखनऊ में कानून का राज सर्वोपरि है और शहरी विकास में किसी भी प्रकार के अवैध हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।