सिया राम किला झुनकी घाट में श्री राम कथा की अमृत वर्षा

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। सरयू के सुरम्य तट पर अवस्थित सिद्ध स्थान श्री सिया राम किला झुनकी घाट में श्री राम जन्मोत्सव के पावन अवसर पर यशस्वी गौ, संत, परमार्थ सेवी पीठाधीश्वर स्वामी श्री करूणानिधान शरण जी महाराज की अध्यक्षता में यशस्वी कथा व्यास श्रद्धेय प्रभंजनानंद शरण जी महाराज के श्रीमुख से हो राज श्री राम कथा की अमृत वर्षा में सराबोर हो कथा श्रोता भक्त कृतार्थ हो रहे हैं।कथा प्रेमी भक्तों को कथा रस का पान कराते हुए पूज्य व्यास जी कहते हैं भगवान के चरणों में यूं ही प्रीति नहीं होती। ऐसी मान्यता है कि काशी में मरने वाले को भगवान शिव मुक्ति कैसे देते हैं। भगवान शिव कहते है मैं काशी में भगवान श्री हरि जी की कृपा से मुक्ति देता हूं। भगवान की कथा ही मन को स्वच्छ, निर्मल, शुद्ध करना है तो एक साधन है भगवान का भजन।ध्यान छोड़ कर ध्यानी लोग भगवान की कथा श्रवण करते है। व्यास जी कहते है इसी मन से हम बंधन में आ सकते है और इसी मन से हम भगवत चरणों में मन लगा सकते हैं, मन ही तो सब कुछ करा रहा है। जिसने भी भगवान की कथा नहीं श्रवण की उसके कान व्यर्थ है। व्यास जी कहते हैं यदि जीवन में कुछ अनुकरणीय है तो वह श्री राम जी का चरित्र है। श्री राम का अवतरण धरा धाम पर 9लाख वर्ष पूर्व हुआ था।जीवन में यदि शत्रु भी मिले तो राम जी जैसा। पति, भाई, पिता, मित्र, मिले तो श्री राम जी जैसा। युद्ध भूमि में बुरी तरह मरणासन्न होने पर राम जी ने रावण को एक अवसर और दिया। रावण कभी रोया नहीं था केवल एक बार जब उसके हाथ कैलाश के नीचे दब गया था। दूसरी बार आज रावण दूसरी बार युद्ध भूमि से आने के उपरांत रावण मंदोदरी के समक्ष रो रहा था। रावण ने कहा में राम के पराक्रम के कारण नहीं रो रहा हूं मैं रो रहा हूं राम के स्वभाव के कारण। यशस्वी व्यास जी कहते यदि कोई चरित्र श्रवण करने योग्य है तो वो श्री राम जी का चरित्र है।