लोधी सम्मेलन का हुआ आयोजन

लखनऊ  वीरांगना अवंतीबाई लोधी के 167वें बलिदान दिवस के अवसर पर बख्शी का तालाब (बीकेटी) विधानसभा क्षेत्र में एक भव्य लोधी सम्मेलन का आयोजन किया गया। अस्ती रोड स्थित मिलन लॉन में आयोजित इस सम्मेलन में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक सुंदर लाल लोधी तथा प्रदेश उपाध्यक्ष सी.एल. वर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष जयसिंह ‘जयंत’ एवं वरिष्ठ नेता राधेलाल लोधी ने की, जबकि संचालन जिला महासचिव शब्बीर अहमद खान ने किया। इस सम्मेलन का आयोजन यशवीर लोधी द्वारा किया गया।समारोह को संबोधित करते हुए श्याम लाल पाल ने वीरांगना अवंतीबाई लोधी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जन्म 16 अगस्त 1831 को ग्राम मनकेड़ी, जिला सिवनी, मध्य प्रदेश में हुआ था। वे भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम महिला योद्धा थीं, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ निर्णायक युद्ध लड़ा। उनका संघर्ष भारत की आजादी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा और 20 मार्च 1858 को वे वीरगति को प्राप्त हुईं।उन्होंने आगे कहा कि पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) समाज को एकजुट होकर वर्तमान जनविरोधी और दमनकारी सरकार को हटाने के लिए संगठित प्रयास करने होंगे। उन्होंने बताया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में पीडीए पंचायतों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि समाज को एक मंच पर लाया जा सके और आगामी चुनावों में समाजवादी सरकार का गठन किया जा सके।इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और लोधी समाज के लोग उपस्थित रहे। इनमें पूर्व विधायक गोमती यादव और राजेंद्र यादव, प्रदेश सचिव विजय सिंह यादव, दिनेश कुमार सिंह, रंजीत यादव, जिला उपाध्यक्ष टी.बी. सिंह, बचान सिंह, ललिता राजपूत लोधी, विदेश पाल, गुड्डू लोधी, विधानसभा अध्यक्ष अजय कुमार रावत, बीकेटी चेयरमैन गणेश रावत, चिनहट की ब्लॉक प्रमुख ऊषा सेन, महिला सभा जिलाध्यक्ष प्रेमलता यादव, पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष मनोज कुमार पाल सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।सम्मेलन में शामिल सैकड़ों लोगों ने वीरांगना अवंतीबाई लोधी के बलिदान को याद करते हुए उनके संघर्ष और योगदान को नमन किया। इस आयोजन को समाज में एकता और जागरूकता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया, जिसमें समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का संकल्प लिया गया।