*दीपावली दिव्य संदेश*-आचार्य सुरेश जोशी

🌹 ओ३म् 🌹 *दीपावली दिव्य संदेश*
भारत माता के वरद पुत्र/पुत्रियों को सादर नमस्ते।आप सबको *दीपावली की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं* ।इस पर्व को मैंने छः (६) भागों में समझाने के लिए पुरुषार्थ किया है। यदि आपने इसका स्वाध्याय मन लगा कर कर लिया तो निश्चित है आपके *घर के साथ आपके मन का दीपक* भी जल उठेगा।
[१] मन का दीपक जलाओ।
[२] शारदीय नवसष्येष्टि।
[३] कार्तिक अमावस्या।
[४] क्या है? दीपावली।
[५] दीवाली+ महर्षि दयानंद।
[६] बहुत बड़ी भ्रांति मिटाओ!
[७] निवेदन+ शंका–समाधान।
*मन का दीपक*
आपने दीपकों से घर जगमगा दिया। कितने दिन? साल में केवल चार-पांच दिन!
फिर क्या होगा? चार दिन की चांदनी। फिर अंधेरी रात मत कीजिए । इस दीपावली पर *पांच -आध्यात्मिक दीप* भी जलाए ताकि पूरे ३६५ दिन आपके लिए दीवाली हो।
[१] प्रथम दीप प्राणायाम !!
[२] द्वितीय दीप जाप का !!
[३] तृतीय दीप धारणा का !!
[४]चतुर्थ दीप ध्यान का!!
[५]पंचम दीप समाधि का!!

*शारदीय नवसष्येष्टि*
आर्यावर्त देश सम्पूर्ण भूगोल में एकमात्र ऐसा देश है जहां हर दो माह में ऋतुपरिवर्तन होता है। ऋतु परिवर्तन के साथ नूतन पर्व भी वैदिक संस्कृति में हर्षोल्लास के साथ मनाते जाते हैं। हमारा देश *उत्सव प्रधान* देश है।
शरद ऋतु में🌾 धान 🌾की मुख्य फसल तैयार होती है। हमारे देश की नारियां *पाक शास्त्र* *औषधि विज्ञान* में दक्ष होती थी।धान की खील🥣 च्यूढ़ा🥣लावा 🥣आदि का प्रचुर मात्रा में निर्माण करती थी। हमारे देश में गन्ना से किसान *गुड़ मिश्री बतासे* आदि मिष्ठ पदार्थों को बनाते हैं।
इतना होने पर भी वैदिक आर्यों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वो किसी भी अन्न स्वयं पहले भक्षण न करके सर्व प्रथम अग्नि देवता को 🔥यज्ञ🔥 करके आहूत करते हैं।इसी बात को ध्यान में रखकर आज के दिन *शारदीय नवसस्येष्टि यज्ञ* किया जाता है जिसमें हवन सामग्री के अतिरिक्त *धान की खील च्यूढ़ा खिलोने बतासे गुड़ जैसे सुगंधित। गिलोय गुग्गल सरसों* जैसी औषधियों व शुद्ध देसी 🔥गो-घृत से यज्ञ🔥 किया जाता है।पर्यावरण को स्वच्छ किया जाता है जिससे शरद ऋतु के संक्रामक बीमारियों का शमन होता है।इसी ऋषि परंपरा को जीवित रखने के लिए हमने अपने आवास *आर्य्यावर्त्त साधना सदन दशहरा बाग बाराबंकी* उत्तर प्रदेश में सपरिवार यज्ञ का आयोजन रखा है।
*कार्तिक अमावस्या*
वैदिक संस्कृति में हर माह दो महान पर्व होते हैं। *कृष्ण पक्ष में अमावस्या व शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा* इन दो तिथियों में समुद्र में *ज्वार-भाटा* आता है जिससे समुद्र से निकलने वाली दूषित गैसें वातावरण को विषाक्त करती हैं ऐसे समय पर अमावस्या व पूर्णिमा को विशेष आहुतियां देकर हमें स्वास्थ्य लाभ होता है।
*क्या है? दीपावली*
दीप +अवली=दीपावली।🪔 दीपों की पंक्ति। 🪔रात्रि में दीपक जलाने से वर्षाऋतु में अनेक 🦠कृमि 🪱जो पर्यावरण को हानि पहुंचाते व *संक्रामक* बीमारियों को जन्म देते हैं वो दीपकों के प्रकाश में नष्ट हो जाते हैं और वातावरण रोगनाशक हो जाता है। इसके साथ ही यह 🪔दीप अवली🪔 हमें प्ररेणा देती है कि जिस तरह बाहर का संसार प्रकाशित हो रहा है उसी तरह आत्म ज्योति का प्रकाशित होना आवश्यक है। यदि मन में *काम🌑क्रोध🌑लोभ🌑मोह🌑 की अमावस्या* बनी रही तो बाहर *🪔दीपक जलाने🪔* से करता फायदा?
जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना।
कि अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए ।। *दीपावली+महर्षि दयानंद*
आज ही के दिन विश्व कल्याणार्थ📚वैदिक संस्कृति📚के प्रचार-प्रसार में जीवन समर्पित करने वाले महामना। *नारी उद्धारक मानवता पुजारी गो-रक्षक राष्ट्र रक्षक महर्षि दयानंद सरस्वती जी* ने अपना नाशवान चोला इस धरती पर रखकर महाप्रयाण किया।
दयानंद देव वेदों का उजाला लेके आये थे।
करों में 🚩ओ३म् 🚩की पावन पताका लेके आए थे।।
*आओ भ्रम मिटायें*
वैदिक संस्कृति का महाभारत काल में बहुत ह्रास हुआ।इसी कारण हमारे पर्वो में अनेक कुरीतियां व भ्रांतियां आ गई हैं कुछ की परिचर्चा मानव कल्याण की भावना से कर रहा हूं शायद किसी को प्रेरणा मिले व किसी का भला हो जावे।
*दीपावली* का श्रीराम जी से कोई लेना-देना नहीं है। श्रीराम जी से पहले से ही यह पर्व वैदिक संस्कृति में मनाया जाता है। दूसरी बात *कार्तिक अमावस्या* को तो सुग्रीव बानर सेना को सीता की खोज में भेजते हैं फिर अयोध्या वापसी का मतलब ही नहीं होता।
कुछ लोग इस पर्व पर *जुआं* खेलते हैं।🍸शराब पीते🍸 हैं।ये दोनों काम हमारे देश की संस्कृति में नहीं होते थे। मुसलमानो व अंग्रेजों ने भारतीयों को *मांस, शराब पीना* सिखाया। अतः हर भारतीय को दीवाली पर तन-मन-धन का दीवाला नहीं निकालना चाहिए !
🪔इस अवसर पर भयंकर गर्जना करने वाले पटाखों पर नियंत्रण रखें।जो लोग *कान रोग 🛞 दमा🛞श्वास🛞स्नोफीलिया🛞सर्दी🛞 जुखाम🛞त्वचा रोग 🛞* से ग्रसित हैं उनका जीना मुश्किल हो जाता है। कितने लोग नये रोगी तैयार हो जाते हैं। अतः त्यौहार के इस पवित्र वातावरण पर *बम
पटाकाओं पर नियंत्रण कर* उसकी जगह पर 🐂 गौ-घृत गूगल गुढ़ आदि सुगंधित पदार्थों से हवन कर पर्यावरण की रक्षा करें।
[ 🪔]मिट्टी के दीपक जलाकर *कुम्हार को रोजगार* दें। 🪷सरसों🪷 के 🪷तेल 🪷व 🪷घी 🪷के जलाने से किसान व पर्यावरण दोनों के उपकार का पुण्य अर्जित करें।
*निवेदन-शंका समाधान !*
मानवता के हित में इस पोस्ट को अधिक से अधिक प्रेषित कीजिए। कोई जिज्ञासा हो तो *७९८५४१४६३६* पर संपर्क भी कर सकते हैं।
आप सभी को 🪔 शारदीय नवसष्येष्टि पर्व दीपावली🪔 की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं ।
*ओ३म्*
आचार्य सुरेश वैदिक
प्रवक्ता एवं पंडिता
रुक्मिणी शास्त्री बाराबंकी उत्तर प्रदेश।