चक्र सुदर्शन धारी कान्हा तेरा नाम पुकारे ।
दर्शन दे दो श्याम बिहारी तेरी राह निहारे।।
चीर हरण से लाज द्रौपदी, तूने देख
बचाई।
पग पग पर है वहसी बैठे, कैसी विपदा छाई।।
सहे त्रासदी नारी देखो, बन आ सुखद सहारे ||
चक्र सुदर्शन धारी कान्हा तेरा नाम पुकारे।।
कहांँ गया वो प्रेम धरा से, तूने जिसे सिखाया।
झूठे लगते रिश्ते नाते, समय कौन सा आया।।
कब आओगे देवकी नंदन, कर दो जरा इशारे ||
चक्र सुदर्शन धारी कान्हा, तेरा नाम पुकारे।।
व्यथित हुआ है हृदय हमारा, कैसे तुझे दिखाऊंँ।
क्रंदन मेरी तुझ तक पहुंचे, राह समझ ना पाऊंँ।।
थर थर देखो कांँप रहे बेटी कुल,देख कन्हैया प्यारे||
चक्र सुदर्शन धारी कान्हा तेरा नाम पुकारे।।
कहे अंजना सुनो सांँवरे धरती पर तू आजा||
अधरों पर ले मुरली अपनी, बंसी तान सुनाजा।।
तरस रही है तेरी अंजना,दर पर पड़ी तिहारे||
चक्र सुदर्शन धारी कान्हा,तेरा नाम पुकारे||
अंजना सिन्हा “सखी ”
रायगढ़