रायबरेली । राणा बेनी माधव बक्श सिंह की 220वीं जयंती की शाम गीत, गजलों और शायरी की महफ़िल सजी। देश और दुनिया में अपना नाम करने वाले कलमकारों से सजी महफ़िल का जादू इस कदर चला की रात के एक पहर तक लोग फिरोज गांधी कॉलेज के सभागार में जमे रहे। कवि सम्मेलन का आगाज कवयित्री मनिका दुबे ने सरस्वती वंदना के साथ में किया। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन की अध्यक्षता मशहूर शायर और गीतकार मंजर भोपाली ने की। कवि सम्मेलन में कवियों ने कविताओं के अलग-अलग रस बिखरे। श्रोता प्रेम रस से भावनाओं में बहे तो कभी हास्य रचनाओं ने उन्हें गुदगुदाया, वहीं वीर रस के कवि गौरव चौहान की कविताओं पर सभी देशप्रेम से ओतप्रोत भी दिखे।
कवयित्री मनिका दुबे ने मां की वंदना आरती की थाल सजाओं जी, वीणापाणि मां को मनाओ जी…सब मिलकर करें वंदन जी, हम सब मैय्या तुम्हारे हैं नंदन जी। श्रंगार में उन्होंने पढा हाल दिल का छिपाना नहीं आएगा, कौन सा तुमसा तराना नहीं आएगा, आज मुस्करान की तुमने तारीफ, अब मेरा मुस्कराना नहीं जाएगा।
अफजल इलाहाबादी ने पढ़ा, मेरी तामीर मुकम्मल नहीं होने पाती, कोई बुनियाद हिलाता है चला जाता है, देर तक गुंज सी रहती है हर महफ़िल में, कोई आवाज लगाता है चला जाता है।
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डॉ. भावना श्रीवास्तव ने पढा, जब दिखाई दे रहा था खुदकुशी का रास्ता, तब अचानक ही मिला ये शायरी का रास्ता, रात वो नेमत है जो रौशन है अपने नूर से वो भला कब देखती है रोशनी का रास्ता। अपनी खूबसूरत गजल वह अगर बेवफा नहीं होता, फिर कोई मसला नहीं होता…जिंदगी ले चले जिधर चाहे, हम से अब फैसला नहीं होता…पढ़कर खूब तालियां बटोरी।
जिले में हास्य के बड़े हस्ताक्षर कवि मधुप श्रीवास्तव उर्फ नरकंकाल ने राणा बेनी माधव पर पढा, जहां राणा बेनी माधव की तलवार युद्ध में खेली है, अंग्रेजों की सेना को रण में कोसों दूर ढकेली है, ये रायबरेली है ये रायबरेली है। इसके साथ ही महंगाई पर कटाक्ष करते हुए लोगों को खूब गुदगुदाया। कोलकाता में हुई वीभत्स घटना पर भी कविता पढ़कर उन्होंने सरकार पर कटाक्ष किया।
प्रेम के कवि स्वयं श्रीवास्तव ने पढ़ा, न जीत में न हार ही जाने में मजा है, मैं जानता हूँ दांव लगाने में मजा है, इस जिंदगी की जंग में हारे जुआरियों, जो जीत गए उनको चिढ़ाने में मजा है…
दिल्ली से आए कवि अभिसार गीता शुक्ल ने अपने छंद कौन है राम पढ़ने के साथ ही कृष्ण के प्रेम पर कविताएं पढ़ी देह पिघल गई मथुरा भर की, देह पिघल गई यमुना कर की…की बनवारी की राह जोहरते। उदासी चखती रहती है दुःखों को धार देती है। मोहब्बत कुछ नहीं करती है लड़के मार देती हैं।
लपेटे में नेता शो के स्टॉर व वीर रस के कवि गौरव चौहान ने मेरा महबूब मेरा भारत के साथ में शुरुआत करते हुए पढा लेकर अपने ह्रदय अयोध्या, मथुरा, काशी खड़े रहो, जय जवान और जय किसान, साधु सन्यासी खड़े रहो, जात-पात का भेद मिटाकर देशद्रोहियों से लड़ने, राणा बेनी माधव के संग वीरा पासी खड़े रहो…इसके अलावा चीन पर पैरोड़ी कितना छोटा तुझे रब ने बनाया कि जी करें पीटता रहूं… पढ़कर तीखा प्रहार किया।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे दो. श्लेष गौतम ने पढ़ा कि हमारा जिस्म बोलेगा हमारी जान बोलेगी, हमारे सह की पाकीजगी की शान बोलेगी, वतन के वास्ते जब भी हमारा सिर कलम होगा, लहू की आखिरी वो बूंद हिंदुस्तान बोलेगी। इसके अलावा देशभक्ति कोई धन के लिए कोई मन के लिए, कोई जीता है बस तन बदन के लिए, याद करती है दुनिया मगर बस उसे जान दे दे जो अपनी वतन के लिए।
देश और दुनिया में अपनी गजल, शायरी और गीतों के लिए मशहूर शायर और गीतकार मंजर भोपाली ने पढ़ा बात जब कीजिए फूल बरसाइये, अपने लफ़्ज़ों को तलवार मत कीजिए, खुद अपने सुधर जाइए तो बेहतर हैं, ये मत समझिए के दुनिया सुधरने वाली हैं। इसके अलावा उन्होंने अपनी गजल रोते-रोते जो हम मुस्कराने लगे…बेटियों पर लिखी गई कविता बेटियां तो बड़ी मासूम है जज़्बाती श्रोताओं की मांग पर पढ़कर उन्होंने महफ़िल को चार चांद लगा दिया।
इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह, अषोक सिंह प्रदेष अध्यक्ष राजद, पूर्व अध्यक्ष नगर पालिका मो इलियास, हरिहर सिंह, एसपी सिंह, प्रदीप सिंह, राजा हर्षेन्द्र सिंह, डॉक्टर मनीष चौहान गोपाल खन्ना, राजन सिंह कछवाह, शिवम सिंह, शिवम मिश्रा, रवि सिंह, अमित सिंह, कमलेन्द्र सिंह भदौरिया, डॉक्टर रवि प्रताप सिंह, हरिशानंद मिश्रा रमेश सिंह, गोविंद खन्ना, सुनील भदोरिया, अंकुष, दिलीप आदि उपस्थित रहे।