*साप्ताहिक वेद वाणी -आचार्य सुरेश जोशी

🌰🌰 ओ३म् 🌰🌰
📚 *साप्ताहिक वेद वाणी*📚
*ओ३म् वायुरनिलममृतमथेदं भस्मान्तं शरीरम्।ओ३म् क्रतो स्मर क्लिबे स्मरण कृतं स्मर ।। यजुर्वेद ४०/१५।।*
🌻 मंत्र का पदार्थ 🌻
🪷 वायु = जीवात्मा 🪷 अनिलम् = अपार्थिव या अभौतिक और 🪷 अमृतम = अमर है ।🪷अथ = और 🪷 इदं शरीरम् = यह शरीर 🪷 भस्मान्तम् = भस्म हो जाने वाला है । 🪷 हे क्रतो! = हे कर्मशील जीवात्मा 🪷 ओ३म् स्मरण = ओ३म् का स्मरण कर। 🪷 क्लिबे = लोक भलाई के लिए स्मरण कर।🪷 कृतम् = अपने किए हुए पिछले कर्मों को 🪷 स्मर ।।
🔥 *मंत्र की व्याख्या 🔥*
ओ३म् यह परमेश्वर का *सर्वोत्तम, मुख्य,निज और प्रिय नाम* है। ओ३म् का अर्थ होता है *सर्वरक्षक यानि परमात्मा प्रतिक्षण हमारी रक्षा* करता है। इस नाम का परिचय स्वयं परमात्मा ने सृष्टि के *प्रथम ग्रंथ वेद* में दिया है।यह ओम नाम ईश्वर का किसी *मत-पंथ संप्रदाय विशेष के लिए नहीं अपितु मानव मात्र* के लिए है। इसीलिए इस ओम नाम का वर्णन *वैदिक धर्म के अतिरिक्त दुनिया के सभी मज़हबी पुस्तकों में* भी आता है।जो प्रमाण रुप में इस प्रकार है।
🍁 *ओम्+बाइबिल 🍁*
बाइबल *अरमाईक भाषा* में लिखी है। क्योंकि ईशा मसीह *अंग्रेजी भाषा* नहीं जानते थे। इस भाषा में *म* का प्रयोग ज्यादा होता है। ईसाई लोग अपनी प्रार्थना के अंत में *आमीन* कहते हैं। अंग्रेजी में *AMEN एमन* कहा जाता है। वैंकिटन सिटी जो ईसाइयों का गढ़ रहा है वहां 🦆 आमीन 🦆 कहने का तरीका इस प्रकार है *आ…….मीन अब आप इसमें से 🫑एन🫑 को निकाल दें तो 🌸 आं 🌸 रह जाता है।यही 🌸आं – अमेरिका में ऐमन रह जाता है।ये सब ओ३म् का ही चमत्कार है।*
🍁 *ओम्+इस्लाम*🍁
इस्लाम में *आमीन की जगह अमीन* कहते हैं यहां भी * *UN निकाल दीजिए 🍁 अं🍁 बच जाता* है।
एक और चीज पर गौर करें! उर्दू में लिखा जाता है *कर्म -उल्दीन मगर पढ़ा जाता है कर्म उद्दीन। लाम के ल को वाव उ बन जाता है। अलिफ़,लाम,मीम। अलिफ़ अ और मीम म् है लाम का उ बना लिया जाय तो अ,उ,म् = ओम् कुरान से भी सिद्ध हो जाता है।*
🍁 *गीता+ओ३म्🍁*
तस्मादोमित्युदाहृत्य यज्ञदान तप: क्रिया:।
प्रवर्तन्ते विधानोक्ता:सततं ब्रह्मवादिनाम्।।१७/२४।।
हे अर्जुन!जो ब्रह्मवादी लोग हैं वो *ओ३म्* बोलकर ही यज्ञ, दान और तप आदि कर्म करते हैं!
🍁 *ओम्+नानक🍁*
गुरूदेव नानक जी भी सिक्खों को यही उपदेश देते थे। *एक ओंकार सतनाम्*
🍁 *ओ३म् +कबीर 🍁*
महात्मा कबीर भी अपने उपदेशों में कहते हैं।
*पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय।।*
क्या आपको पता है ढाई अक्षर क्या है! *अ पूरा + उ पूरा + म् (म पर हलन्त लगने पर म् आधा अक्षर बनता है।अब इन तीनों यानि दो अक्षर पूरा व एक अक्षर हलन्त आधा मिला दीजिए (अ +उ+म् = ओ३म्) बन गया।* इसी ओ३म् का जाप महात्मा कबीर भी करते थे।
सज्जनों पवित्र वेद मंत्र में परमात्मा ने उपदेश दिया है कि यदि जीवन में सुख शांति चाहते हो तो प्रतिदिन *ओ३म्* का जाप कीजिए।इसी बात को *महात्मा तुलसीदास* जी ने कहा……
*दो घड़ी आधी घड़ी।आधी पै पुनि आध।*
*तुलसी संगत साधु की हरै कोटि अपराध।*
दो घड़ी = ४८ मिनट।आधी घड़ी=२४ मिनट।आधी = १२मिनट। पुनि आध= ६मिनट। *अर्थात् कम से कम प्रति मनुष्य को चाहे स्त्री हो या पुरुष प्रतिदिन छः मिनट जाप करना* अनिवार्य है।
🍁 *ओ३म्+नासा वैज्ञानिक*🍁
नासा के अवकाश प्राप्त *सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक ओमप्रकाश पांडेय* कहते हैं जो 🌸 *प्रतिदिन सुबह छः मिनट ओ३म्🌸* का ध्यान करते हैं उन्हें निम्न लाभ होते हैं।
🌹 मस्तिष्क के अनेक रोग दूर होकर मस्तिष्क में *विशेष वाईब्रेशन* दूर होते हैं।
🌹 टेंशन यानि तनाव दूर होता है।🌹 प्रातः सायं छः मिनट ध्यान से आक्सीजन लेवल बढ़ता है।🌹 रक्तचाप, हृदयरोग, कोलस्ट्रॉल, ठीक होता है।🌹दो सप्ताह में घबराहट, बेचैनी,भय, एंग्जाइटी दूर होती है।🌹कंठ में विशेष कंपन, मांसपेशियों को शक्ति मिलती है।🌹 थाइराइड,गले की सूजन व स्वर दोष दूर होती है।🌹 सात दिन तक *दिन में तीन बार छः मिनट* जाप से पाचन तंत्र,लीवर आंतों की शक्ति बढ़ती है।🌹 छः माह में सारे उदर रोग ठीक होते हैं।🌹 साहस बढ़ता है व आत्महत्या के विचार जड़ से समाप्त हो जाते हैं।
आचार्य सुरेश जोशी
🌼 *वैदिक प्रवक्ता 🌼*