🌴 *ओ३म्*🌴
📚 ईश्वरीय वाणी वेद 📚
*ओ३म् इंद्र मृळ मह्यं जीवातुमिच्छ चोदय धियमयसो न धाराम्। यत् किं चाहं त्वायुरिदं वदामि तज्जुषस्व कृधि मा देववन्तम् ।।*
ऋग्वेद ६/४७/१०
🪷 *मंत्र का पदार्थ*🪷
🌻 इन्द्र = सर्वशक्तिमान ईश्वर। 🌻 मृळ = कृपा करो! 🌻 मह्यम् = मेरे लिए 🌻जीवातुम् = जीविका को 🌻 इच्छ = दीजिए। 🌻 अयस: धाराम् = तलवार की धार के समान 🌻 धियम् = बुद्धि को 🌻चोदय= तीक्ष्ण बनाइये। 🌻 त्वायु: = मुझको मन से चाहने वाला 🌻 अहम् = मैं 🌻 यत् किं च = जो कुछ भी 🌻 इदम् इदानीम् = यहां इस जीवन में 🌻वदामि= मांगूं , निवेदन करुं 🌻 तत् = उसको 🌻 जुषस्व = दीजिए । 🌻 मा-माम् = मुझे 🌻 देववन्तम् = देवों के दिव्य गुणों से युक्त 🌻 कृधि = कीजिए।
🌼 *मंत्र की मीमांसा*🌼
यह मंत्र 🥝 उत्कृष्ट जीवन 🥝 जीने के कतिपय सूत्र हमें दे रहा है।
[१] जीवन में आगे बढ़ने के लिए ईश्वर की कृपा अनिवार्य है। ईश्वर 🪴 कृपालु और दयालु 🪴 दोनों ही है।अंतर इतना है कि उसकी 🌱 दया सब पर है मगर कृपा किसी किसी 🌱 पर ही होती है। दुनिया में कोई कितना ही परिश्रम कर लें।अरब पति -खरबपति बन जाए मगर बिना ईश्वर की कृपा के जीवन पुष्प नहीं खिलता है। कृपा उसी को मिलती है जो ईश्वर के संविधान का पालन करता है।जब संसार में 🍁 खरबपति और दरिद्र 🍁 दोनों दुखी हों तो समझ लेना 🌾 एक अहंकारी हैं तो दूसरा आलसी 🌾 जब ईश्वर की कृपा होती है तो *अहंकार और आलस*दोनों नष्ट हो जाते हैं।
[२] मानव के आय कू तीन स्त्रोत हैं। 🌸 जीविका / आजीविका/ सम्यक् जीविका। धन आए।चाहे जैसे आए।चोरी से, बेइमानी से,छल सूं धोखे से घोटाले से,व्याज से आना चाहिए उसे कहते हैं *जीविका* । जो धन परिश्रम से आता है मगर अपने ही भोग विलास में खर्च होता है उसे। *आजीविका* कहते हैं।जो धन परिश्रम से आता है और उसका शतांश भाग परिवार, समाज, राष्ट्र व विश्व कल्याण में लगता है उसे *सम्यक् जीविका* कहते हैं। मंत्र में ईश्वर से सम्यक् जीविका की प्रार्थना की गई है।
[३] यदि मनुष्य के पास बुद्धि नहीं है तो उसका ऐश्वर्य,यश, कीर्ति कभी भी मिट्टी में मिल सकता है इसलिए परमात्मा से प्रार्थना है प्रभो! हमें धार धार बुद्धि चाहिए।
[४] अंतिम प्रार्थना है कि हे ईश्वर! दुनिया में एक से बढ़कर एक बुद्धि जीवी हैं मगर उनमें *दिव्यता -प्रेम-विनयशीलता-दया-करुणा* का नितांत अभाव रहता है इसलिए प्रभो! मुझे दिव्य पुरूषों अर्थात् *जीतेंद्रिय -धर्मात्मा-योगी पुरुषों का सानिध्य प्राप्त कराते रहना।
आचार्य सुरेश जोशी
🌹 वैदिक प्रवक्ता 🌹