🌼🌼 ओ३म् 🌼🌼
📙 ईश्वरीय वाणी वेद 📓
*ओ३म् ईशा वास्यमिदॅं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृध कस्य स्वित् धनम्।।*
।। यजुर्वेद ४०/१।।
🏵️ मंत्र का पदार्थ 🏵️
जगत्याम् = इस सृष्टि रुपी प्रपंच में 🌻 यत् किंच = जो कुछ 🌻 जगत् = गतिविधान है 🌻 इदम् सर्वम् = वह सब 🌻 ईशा = परमात्म शक्ति द्वारा 🌻 आवास्यम् = परिपूरित होना चाहिए। 🌻 तेन = उस जगत या गतिविधान की सहायता से 🌻 भुंजीथा: = हे मनुष्य! तू सुख का उपभोग कर। 🌻 त्यक्तेन – त्यक्तेन जगता = ऐसे गतिविधान के द्वारा जिसको तूने छोड़ दिया है अर्थात जिसमें तू चिपटा नहीं है। 🌻 मां गृध: = चिपट मत ! 🌻 धनम् = धन 🌻 कस्य स्वित् = किसका है? अर्थात् किसी एक का नहीं ।
🌹 स्वर्णिम सूत्र 🌹
मानव जीवन को सफल बनाने का इस उत्तम ज्ञान वेद के अतिरिक्त कहीं भी नहीं है। दुनिया का हर मानव यदि 🍁 निष्पक्ष चिंतन करके 🍁 सोचे और इन सूत्रों को जीवन में उतार लें तो संपूर्ण विश्व में 🌸 मत -पंत-मजहब-संप्रदाय 🌸 सब नष्ट हो जायेंगे।तब जो बचेगा उसका नाम होगा 🪷 मानव और मानवता 🪷 आइए अब इन चार सूत्रों पर 🌴 परिचर्चा 🌴 करते हैं जो इस 🪴 पतित पावन 🪴 मंत्र में दिए हैं।
[१] पहला सूत्र है। ईश्वर कण -कण में है! भला इसमें किसको आपत्ति हो सकती है। हां एक बात और याद रहे कि 🕉️कण -कण में भगवान है मगर कण कण भगवान नहीं या हर कंकर में शंकर है मगर कोई भी कंकर शंकर नहीं🕉️अब रही बात नास्तिक की तो उससे पूछो? तुमको किसने पैंदा किया? वो कहेगा! मेरे बाप ने। फिर पूछो तुम्हारे बाप को किसने पैंदा किया तो कहेगा उनके बाप ने। फिर पूछो बाप के बाप को किसने पैदा किया तो कहेगा! बाप के बाप ने । अंतिम प्रश्न पूछो? 🌱 बाप के बाप ,बाप के बाप सबके बाप को , बापों के बाप को किसने पैदा किया? या तो यह कहेगा कि ईश्वर ने और उसी समय व 🌾 आस्तिक 🌾 हो जायेगा या कहेगा मुझे नहीं मालुम कहकर चुप हो जायेगा। चुप होने का मतलब ही है कि 💫 ईश्वर 💫 के अलावा कोई उत्तर ही नहीं हो सकता!
[२] ईश्वर के बनाए इस संसार में जो कुछ भी *जड़ -चेतन* वस्तु दिख रही है उसका एकमात्र मालिक ईश्वर ही है। चाहे वह वस्तु आपके पास हो, मेरे पास है या किसी और के पास।
[३] संसार की सब वस्तुओं को परमात्मा की जानकर आपस में मिल बांटकर खाओ जैसे पिता की लाई वस्तु को घर में 🥝भाई -बहन मिल बांटकर खाते हैं 🥝 जो अकेले खाता है वो पाप खाता है।
[४] सबसे 🍃 अहं व महत्वपूर्ण 🍃 बात है कि किसी के भी धन का 🌻 लोभ -लालच 🌻 न करो! क्योंकि इस धन सम्पत्ति, वैभव, ऐश्वर्य का वास्तविक मालिक तो परमात्मा ही है वो अपनी दी हुई वस्तु को कभी भी बिना वारंट दिए भी छीन सकता है। ईश्वर ने आपको देते समय बिना पूछे सब कुछ दिया है इसलिए वह बिना पूछे ले भी सकता है। सत्य बात तो ये है कि 🏵️ हमें दूसरे के धन का लालच तो नहीं ही करना है मगर अपने धन का भी लालच नहीं करना है 🏵️ इतना सुन्दर उपदेश वेद में ही संभव है। इसीलिए इसको 📚 ईश्वरीय वाणी वेद 📚 कहा गया है।
आचार्य सुरेश जोशी
🌹 वैदिक प्रवक्ता 🌹