इस ग्रीष्म ऋतु में क्या करें-आचार्य सुरेश जोशी

🌳 *ओ३म्* 🌳
🌻 ग्रीष्मकालीन दिनचर्या 🌻
इस समय संपूर्ण भारत गर्मी की चपेट में है। यद्यपि यह ऋतु के अनुसार हो रहा है। इसमें आश्चर्य करने की बात नहीं है मगर दुख इस बात है गर्मी की अधिकता 🌴 ग्लोबल वार्मिंग 🌴 के कारण है। मगर इस समय इसके निवारण पर ध्यान देना ही आवश्यक है जिससे जीवन शैली सामान्य रहे!
यदि आज भी हम अपनी प्राकृतिक जीवन शैली को अपनाना प्रारंभ कर दें तो हम ऋतु के संक्रामक रोगों से बच सकते हैं।
🏵️ *प्रातः कालीन दिनचर्या*🏵️
प्रातः काल ऊषापान में जल में नींबू निचोड़ कर सादे जल को पीकर अन्य कार्य करें। व्यायाम हल्का करें। भ्रमण अवश्य करें। प्राणायाम केवल *बाह्य प्राणायाम ओर शीतली प्राणायाम* ही करें! नारियल पानी,सत्तू का प्रयोग करें! जूस में खीरा+लौकी+पुदीना= काला नमक मिलाकर सेवन करें।मट्ठे का सेवन करें!
🌸 प्रातः १० से २ तक 🌸
भोजन से पूर्व पेट भरकर कच्चा सलाद लें। *रोटी चावल सब्जी ना के बराबर*लें! दोपहर में बाहर जाते समय दाहिने कान में रुई लगा लें शरीर ठंडा रहेगा। आम का पना अवश्य लें!
🩸 रात्रि कालीन दिनचर्या 🩸
रात्रि में भोजन हल्का और सूर्यास्त से पहले लें। खुले जगह पर जहां हवा स्वच्छ है वहां शयन करें।
🪷 क्या न करें 🪷
आइस्क्रीम, कोल्डड्रिंक,वर्फ का सेवन न करें। मटके का पानी पीयें। कूलर,फ्रिज के पानी से बचें। ए सी का प्रयोग कम से कम करें।शीतल जल से प्रातः सायं अवश्य स्नान करें। मांसाहार, शराब आदि से बचने की आवश्यकता है।अपने चिकित्सक स्वयं बनें। प्रसन्न रहें।अपनी सहन शक्ति बढ़ायें।
रास्ते के लिए शंखपुष्पी ले सकते हैं। सूखे आंवले के टुकड़े मुख में पान की तरह रखें व टाफी की तरह चूसें तथा उसके बाद जल पी सकते हैं।
*स्वस्थ रहें!मस्त रहें*
आचार्य सुरेश जोशी
*वैदिक प्रवक्ता*

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