मुंबई की सरज़मीन पर एक खूबसूरत गाइका और शायरा पूनम विश्वकर्मा,,,

अनुराग लक्ष्य, 21 अप्रैल
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुम्बई संवाददाता ।
रखती ज़ख्मों का तू हिसाब नहीं,
जिन्दगी तेरा भी जवाब नहीं ।
खार ही खार क्यों हैं दामन में,
एक औरत हूं मैं गुलाब नहीं ।।
जी हां, यह अशआर हैं मुम्बई की जानी मानी शाएरा पूनम विश्वकर्मा के , जिन्होंने गत दिनों धरावी के एक मुशायरे में Saleem Bastavi Azizi के संचालन में अपना यह कलाम सुनाकर श्रोताओं के दिलों में उतर गईं। आपको बताते चलें कि पूनम विश्वकर्मा एक कोहना मश्क शायरा के साथ एक बेहतरीन गायिका भी हैं। जिनके गीत फिल्म इंडस्ट्री के अनूप जलोटा से लेकर फिल्म इंडस्ट्री के कई नामी गिरामी गायकों ने अपनी आवाज़ में पूनम जी के गीतों और ग़ज़लों को अपनी आवाज़ दी है। जो आवाम के बीच खासे लोकप्रिय भी हुए हैं।
उनकी इसी कामयाबी को देखते हुए अनुराग लक्ष्य के मुम्बई संवाददाता Saleem Bastavi Azizi ने मासिक पत्रिका अनुराग लक्ष्य के लिए उनका एक खास इंटरव्यू भी लिया है जो आपको अनुराग लक्ष्य के मई के आने वाले अंक में आप ज़रूर पढ़ सकते हैं।
मुंबई के अदबी और साहित्यिक गहवारों में आज पूनम विश्वकर्मा एक कोहना मश्क शायरा के रूप में अपना खास मुकाम हासिल कर चुकी हैं। प्रस्तुत हैं उनके कुछ खास अशआर।
,, हूं पहेली तो मुझे हल करदे
तू मुझे छू के मुकम्मल करदे ,,

,,जिस्म लोबान बना दे मेरा
रूह को मेरी तू संदल कर दे ,,,

प्रस्तुति, सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,,,

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