एनीमिया और कुपोषण से बचाव को आज से चलेगा विशेष अभियान

एनीमिया और कुपोषण से बचाव को आज से चलेगा विशेष अभियान

जनपद में 5.61 लाख बच्चों को विटामिन-ए और आईएफए सिरप देने का लक्ष्य

सप्ताह में दो दिन (बुधवार व शनिवार) बच्चों को पिलाया जाएगा आयरन सिरप

बहराइच, 09 जून। जनपद में आज यानी बुधवार से विटामिन ‘ए’ सम्पूरण कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। अभियान के तहत 9 माह से 5 वर्ष तक के 5 लाख 61 हजार बच्चों को विटामिन-ए की खुराक दी जाएगी, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो सके और वे विभिन्न बीमारियों से सुरक्षित रह सकें। इस बार अभियान में नवाचार करते हुए 6 माह से 59 माह तक के बच्चों को आयरन फोलिक एसिड सिरप का भी वितरण किया जाएगा, जिससे एनीमिया की रोकथाम में मदद मिलेगी।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि बच्चों के शारीरिक विकास और संक्रमण से सुरक्षा के लिए विटामिन-ए बेहद जरूरी है। इसकी नियमित खुराक बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है और उन्हें कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ बचपन ही सशक्त राष्ट्र की नींव है। अभिभावक अपने बच्चों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र, आयुष्मान आरोग्य मंदिर या आंगनबाड़ी केंद्र पर अवश्य लेकर आएं, ताकि कोई भी बच्चा इस महत्वपूर्ण अभियान से वंचित न रहे।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एस.के. सिंह ने बताया कि एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत 6 माह से 59 माह तक के बच्चों को 50 मिलीलीटर आईएफए सिरप की बोतल उपलब्ध कराई जाएगी। बोतल पर विशेष ऑटो डिस्पेंसर लगा होगा, जिससे बच्चों को सही मात्रा में सिरप दिया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक बच्चे को सप्ताह में दो बार, बुधवार और शनिवार को, 1-1 मिलीलीटर आयरन सिरप पिलाना है। अभिभावकों को सिरप के उपयोग, मात्रा और समाप्ति तिथि के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

डॉ. एसके सिंह ने बताया कि विटामिन-ए की कमी से बच्चों को कम रोशनी या रात के समय देखने में कठिनाई हो सकती है। इसके अलावा आंखों में सूखापन, बार-बार दस्त और निमोनिया जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है। वहीं आयरन की कमी से बच्चे सुस्त रहने लगते हैं, उनकी त्वचा और नाखूनों में पीलापन दिखाई देता है, भूख कम लगती है और थोड़ी शारीरिक गतिविधि के बाद ही थकान महसूस होने लगती है। ऐसे बच्चे एनीमिया के शिकार हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों में आयरन और विटामिन-ए की कमी को दूर कर स्वस्थ विकास सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान यदि किसी बच्चे में एनीमिया के गंभीर लक्षण पाए जाते हैं तो उसे आगे की जांच और उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्र पर संदर्भित किया जाएगा।

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