ये बंधन जीवन का साजन,हर पल तुम जो साथ हो।
करुंँ दुआ मैं रहो सलामत,हाथों में अब हाथ हो।।
मिलकर समझी प्रेम तुम्हारा,
तुम ही सुख के सार हो।
रहें नहीं अब दूर कभी हम,तुम ही मेरा प्यार हो।।
बिखरे से मेरे जीवन को,करते तुम्हीं सनाथ हो…
ये बंधन जीवन का साजन,हर पल तुम जो साथ हो।।
चाहे जितने मौसम बदलें,छोड़ नहीं तुम जाना।
रचे बसे मेरी रग रग में,तुमको अपना माना।।
अमर सुहाग तुम्हीं हो मेरे,
प्रियतम मेरे नाथ हो..
ये बंधन जीवन का साजन,हर पल तुम जो साथ हो।।
शूलों पर भी साथ निभाना,करूंँ सदा मैं वादा।
हँसी रहे नित तेरे मुख पर,मेरा अटल इरादा।।
तुम ही हो सिंदूर रचे जो,सदा अंजना माथ हो।
ये बंधन जीवन का साजन,हर पल तुम जो साथ हो।।
अंजना सिन्हा “सखी “
रायगढ़