सुन्नी दावत ए इस्लामी का तीन दिवसीय इज्तेमा में दिखा मुसलमानों का जन सैलाब


अनुराग लक्ष्य, 3 दिसंबर
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुम्बई संवाददाता ।
,,हमारी कौम को दुनिया मिटा न पाएगी
किसी माहाज़ पर हमको झुका न पाएगी
हकीकतों की शमां अब भी हमसे रोशन है
बुझा न चाहे तो इसको बुझा न पाएगी,,
मुसलमानों की बका , और तहफ्फुज के लिए मुंबई सी एस टी के आज़ाद मैदान में सुन्नी दावत ए इस्लामी का तीन दिवसीय इज्तेमा अपनी पूरी शिद्दत और अकीदत के साथ देखने को मिल रहा है। मुसलमान औरतों और मर्दों का एक जन सैलाब उमड़ पड़ा है। जिसमें पहले दिन 1 दिसंबर को औरतों के जीवन शैली और उनके हुकूक की लड़ाई के लिए उल्मा हजरात ने रोशनी डालते हुए मुस्लिम खोवातीन को समाज में अपने वजूद को कैसे कायम ओ दाएम रखा जाए, जिससे उनकी जिंदगी खुशगवार गुज़रे।
सुन्नी दावत ए इस्लामी के रूह ए रवाँ हज़रत ए अल्लामा मौलाना शकील अहमद नूरी साहब के बयानात ने आवाम को भरपूर बेदार किया। मुस्लिम समाज की औरतों को परदे की अहमियत से लेकर अपने शौहर के हुकूक और घर को जानत बनाने का हुनर सिखा गए।
दूसरे दिन 2 दिसंबर को होने वाले पुरुषों के इज्तेमा में भी एक जन सैलाब देखने को मिला। उल्मा हजरात ने कौम की फलाह और बहबूदी के बारे में जितनी भी जानकारी दी, मुस्लिम कौम के मुसलमान अगर अपनी ज़िंदगी में अमल पैरा हो जाएं तो निश्चित ही मुस्लिम समाज का सही मायनों में उत्थान और विकास भारत की सरजमीं पर निश्चित है।
आज़ाद मैदान की शोभा इस वक्त देखने लायक है, जहां पूरी मुंबई के अतिरिक कल्याण, नासिक, पनवेल, पूना और शोलापुर के भी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस इज्तेमा में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। मुंबई बीएमसी और मुंबई पुलिस के संरक्षण में यह तीन दिवसीय इज्तेमा का आखरी दिन है, जहां मुस्लिम समाज के उत्थान और बेहतरी के लिए एक सार्थक मैसेज पूरे समाज को जा रहा है, जो सराहनीय है।

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