अशर्फी भवन में पुरुषोत्तम मास का दिव्य आयोजन: 51 विद्वानों द्वारा पारायण और पंचनारायण महायज्ञ शुरू

जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्रीधराचार्य जी महाराज के सानिध्य में उमड़ रहा श्रद्धा का सैलाब

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। पुरुषोत्तम मास के पावन उपलक्ष्य में सुप्रसिद्ध पीठ अशर्फी भवन में आध्यात्मिक उत्सव की धूम है। जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री श्री धराचार्य जी महाराज के पावन सानिध्य में परिसर में विविध धार्मिक अनुष्ठान, श्रीमद्भागवत का मूल पारायण, पंचनारायण महायज्ञ, चतुरवेद पारायण और आगम शास्त्र पारायण अत्यंत श्रद्धापूर्वक संपन्न किया जा रहा है। इस भव्य आयोजन में 51 प्रकांड विद्वानों द्वारा मंत्रोच्चार से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया है। 108 रजत कलशों से भगवान का महाअभिषेक अनुष्ठान के अंतर्गत दक्षिण भारत से पधारे विशेष दाक्षिणात्य विद्वानों द्वारा भगवान विश्वकसेन का विशेष पूजन, अर्चन और अंकुरारोपण किया गया। स्वामी श्रीधराचार्य जी महाराज के यजमानत्व में आयोजित हवन यज्ञ में विशेष औषधीय द्रव्यों द्वारा आहुतियां प्रदान की जा रही हैं।
इसके साथ ही, भगवान श्री लक्ष्मीनारायण का सपरिकर पुष्प यज्ञ एवं महाअभिषेक का दिव्य आयोजन हुआ। इस दौरान 108 रजत कलशों में पवित्र सरयू जल, गो-दुग्ध, दही, घी, शहद, पंचामृत, सर्वऔषधि जल, मधु, सुगंधित इत्र और विभिन्न फलों के रसों से भगवान का अलौकिक महाअभिषेक किया गया। मध्यान काल में भगवान की दिव्य फूल बंगला झांकी सजाई गई और तुलसी पुष्पों से 1008 अर्चना कर महाआरती की गई। अनुष्ठान के बाद प्रतिदिन वृहद भंडारे का आयोजन भी चल रहा है।
यज्ञ और अभिषेक से होती है आत्म व पर्यावरण शुद्धि: पूज्य महाराज
भक्तों को संबोधित करते हुए पूज्य महाराज जी ने भगवत आराधना और अभिषेक का महत्व समझाया। उन्होंने कहा यज्ञ साक्षात भगवान का ही स्वरूप है। यज्ञ और भगवान के अभिषेक से न केवल आत्म शुद्धि होती है, बल्कि पर्यावरण की भी शुद्धि होती है। हम सभी जीव परमात्मा के अंश हैं और प्रभु हमारे अंशी हैं। इसलिए हमें सदैव भगवान के स्मरण, चिंतन और आराधना में लीन रहना चाहिए। चतुर्थ दिन गूंजा राम-कृष्ण जन्मोत्सव, भावविभोर हुए भक्त शाम के सत्र में महाराज श्री की अमृतमयी वाणी से प्रवाहित हो रही श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर प्रभु श्री राम और श्री कृष्ण के जन्म प्रसंगों का सजीव वर्णन किया गया। कथा श्रवण कराते हुए महाराज श्री ने कहा कि सज्जनों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए ही प्रभु राम और कृष्ण के रूप में अवतरित होते हैं। सभी मनुष्यों को मानवता की शिक्षा देने के लिए प्रभु श्री राम ने मानव रूप में श्री अवध धाम में अवतार लिया। कथा प्रसंग को सुनकर पाण्डाल में उपस्थित भक्तजन भावविभोर होकर झूम उठे।