पौली कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर सोमवार को राम जानकी मार्ग के दक्षिण के क्षेत्र को अभिसिंचित कर रही पवित्र माँ सरयू के पावन तट पर स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भोर से ही मोटरसाइकिल,ट्रैक्टर-ट्राली, टैम्पों के साथ ही पैदल जाने वाले श्रद्धालुओं के भक्ति गीतों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। इसके साथ ही माँ सरयू के पावन तट पर पहुँच कर श्रद्धालुओं द्वारा स्नान दान कर सुखी जीवन की कामना की गई। महिलाओं द्वारा माँ सरयू को कड़ाही चढ़ाई गई। आस्थावान लोगों ने वैदिक मंत्रों के बीच गऊ दान भी किया। बहुत से भक्तों ने पवित्र सरयू मैया की गोदी में सत्यनरायन कथा का श्रवण किया।
पूर्णिमा के महत्व को बताते हुए आचार्य कृपा शंकर पाण्डेय ने कहा कि हिंदू धर्म में पूर्णिमा पर्व पर स्नान,दान का बड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। जिस वर्ष अधिकमास या मलमास आता है। तब इनकी संख्या बढ़कर 13 हो जाती है। इस दिन पवित्र जलाशयों में स्नान दान करके पूरे दिन व्रत रखने से मानव की सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुर पूर्णिमा भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था तथा इसी दिन भगवान विष्णु ने प्रलय काल में वेदों व धर्म की रक्षा के लिए तथा सृष्टि को बचाने के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था।
भगवान श्री कृष्ण पांडवों को साथ लेकर माँ गंगा के मैदान में पहुँच कर एक धार्मिक अनुष्ठान किया था।
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