सीड बॉल पर्यावरण संरक्षण की नई परिकल्पना- डॉ नवीन सिंह

सीड बॉल पर्यावरण संरक्षण की नई परिकल्पना- डॉ नवीन सिंह

 

विश्व पर्यावरण दिवस माह के मौके पर बच्चों को पर्यावरण से जोड़ने के लिए बताया सीड बॉल का महत्व, फिर बन गए कई सारे बॉल

 

बच्चों, ग्रामीणों और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से मानसून पूर्व तैयार किए जा रहे 10 हजार सीड बॉल,

 

सीड बॉल बनाकर प्रकृति संरक्षण की अनूठी पहल, हरित बस्ती के निर्माण पर जोर

 

बस्ती: वैश्विक थीम “प्रकृति से प्रेरित – जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” विषय पर जनपद में चल रहे विश्व पर्यावरण दिवस माह के तहत विश्व युवक केंद्र, नई दिल्ली एवं युवा विकास समिति, बस्ती के संयुक्त तत्वावधान में अनूठी पहल करते हुए पर्यावरण संरक्षण के कार्यों से नई पीढ़ी को जोड़ने के उद्देश्य से बच्चों को पहले तो मिट्टी और तरह-तरह के बीज उपलब्ध कराए। उन्हें इससे सीड बॉल बनाना और उपयोग करना सिखाया। आने वाले वक्त में इसकी आवश्यकता पर भी बल देते हुए बच्चों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई गई।

 

इस मौके पर मुख्य अतिथि डॉ नवीन सिंह नें ने बताया कि यह सीड बॉल पर्यावरण संरक्षण की नई परिकल्पना है। इसमे बीज और मिट्टी से बॉल तैयार करते हैं, और इसे खाली इलाकों में बरसात के दिनों में फेंक दिया जाता है। इसमें अंकुरण के साथ नये-नये पौधे सुनसान इलाके में भी तैयार हो जाते हैं, जो आने वाले दिनों में एक बड़े पेड़ बनकर हमारे पर्यावरण को हरा-भरा करते हैं। हमने बच्चों को इसको लेकर जागरूक किया है, जिससे वे अपने आसपास के एरिया में इसको ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। इससे ज्यादा एरिया रेन कवर हो सके। हमें उम्मीद है कि इसके भविष्य में अच्छे रिजल्ट मिलेंगे।

 

बृहस्पति कुमार पाण्डेय नें बताया की सीड बॉल बनाने के लिए दूसरा तरीका यह है जिसमें मिट्टी, खाद एवं बीजों का एक छोटा गोलाकार मिश्रण होता है, जिसे बीजों को पक्षियों, कीड़ों एवं कठोर मौसम से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से तैयार किया जाता है। मिट्टी एवं खाद की परत बीजों को संरक्षण प्रदान करती है तथा उन्हें सूखने अथवा जानवरों का भोजन बनने से बचाती है। वर्षा होने पर यह बॉल धीरे-धीरे गल जाती है और उसमें मौजूद खाद बीजों को आवश्यक पोषण प्रदान करती है, जिससे पौधों का अंकुरण प्रारंभ हो जाता है। यह तकनीक कम खर्चीली, सरल एवं पर्यावरण अनुकूल है, जिसे कोई भी व्यक्ति आसानी से तैयार कर उपयोग में ला सकता है।

 

उन्होंने बताया की जनपद में चल रहे माह भर के इस अभियान के समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ा जा रहा है। जिसके तहत विभिन्न प्रकार के बीजों का संकलन किया जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से नीम, जामुन, करंजी, महुआ, सीताफल, आम, बहेड़ा एवं गुलमोहर जैसे वृक्षों के बीज शामिल हैं। इन बीजों से बड़े स्तर पर सीड बॉल तैयार किए जा रहे हैं, जिनका उपयोग आगामी दिनों में विशेष अभियान चलाकर खाली एवं अनुपयोगी भूमि पर वृक्षारोपण हेतु किया जाएगा। इस मौके पर राम पूरन चौधरी और संजय कुमार गौतम नें भी अपने विचार रखा। कार्यक्रम में भारी संख्या में बच्चे मौजूद रहे जिन्होंने सीड बाल निर्माण किया।