चकबंदी विभाग में ‘तानाशाही’ का आरोप: लेखपाल संघ का बड़ा विस्फोट, डीएम से तत्काल कार्रवाई की मांग

चकबंदी विभाग में ‘तानाशाही’ का आरोप: लेखपाल संघ का बड़ा विस्फोट, डीएम से तत्काल कार्रवाई की मांग

 

प्रताड़ना से हड़कंप: दो अधिकारी अस्पताल में, एक कोमा में—महिला कर्मियों से देर रात तक काम का आरोप

 

50+ कर्मियों का सामूहिक विद्रोह: ‘जब तक हटेंगे नहीं अधिकारी, तब तक रहेगा कार्य बहिष्कार’

 

जितेन्द्र पाठक

 

 

संत कबीर नगर। जनपद के चकबंदी विभाग में उस समय हड़कंप मच गया जब उत्तर प्रदेश चकबंदी लेखपाल संघ की जनपद शाखा ने जिलाधिकारी को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी विनय कुमार सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। संघ ने उन्हें तत्काल जनपद से हटाने की मांग करते हुए साफ चेतावनी दी है कि कार्रवाई न होने पर कार्य बहिष्कार और भूख हड़ताल जारी रहेगी।

 

ज्ञापन दिनांक 25 अप्रैल 2026 को सौंपा गया, जिसमें अध्यक्ष पंकज यादव, मंत्री आर्येन्द्र उपाध्याय एवं संरक्षक धनन्जय चौधरी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अधिकारियों व कर्मचारियों ने हस्ताक्षर किए। संघ का आरोप है कि बंदोबस्त अधिकारी विनय कुमार सिंह द्वारा विभागीय कर्मियों को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे पूरे विभाग में भय और आक्रोश का माहौल है।

 

प्रताड़ना के गंभीर आरोप:

संघ के अनुसार लगातार दबाव और उत्पीड़न के चलते सहायक चकबंदी अधिकारी श्याम सिंह एवं राम दुलारे अस्पताल में भर्ती हैं और जीवन-मृत्यु से जूझ रहे हैं। वहीं 22 अप्रैल 2026 को चकबंदी कर्ता मुकेश कुमार की दिमाग की नस फट गई, जिसके बाद वह कोमा में चले गए और उनका इलाज मेरठ में चल रहा है।

इसके अलावा महिला कर्मियों एवं लिपिक संवर्ग से सुबह 8 बजे से रात 9 बजे तक जबरन कार्य कराया जा रहा है। आरोप है कि उस समय पर्याप्त पुरुष स्टाफ मौजूद नहीं रहता, जिससे महिला कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना बनी रहती है।

धमकी और दबाव का आरोप:

संघ ने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि संबंधित अधिकारी कर्मचारियों को लगातार धमकाते और अपमानित करते हैं। आरोप है कि वह कहते हैं—“मैं गिरीश सिंह का आदमी हूं, कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, जिलाधिकारी व अपर जिलाधिकारी मेरी जेब में हैं।” इस तरह के कथनों से कर्मचारियों में भय का माहौल व्याप्त है।

 

कार्य पर असर, कर्मचारी अवसाद में:

चकबंदी विभाग प्रदेश में अपनी बेहतर कार्यप्रणाली के लिए जाना जाता है और संत कबीर नगर पिछले दो वर्षों से शीर्ष स्थान पर रहा है। इसके बावजूद बिना किसी स्पष्टीकरण या चेतावनी के कर्मचारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी जा रही है, जिससे कर्मचारी मानसिक अवसाद का शिकार हो रहे हैं और कार्य प्रभावित हो रहा है।

कार्य बहिष्कार व भूख हड़ताल का ऐलान:

संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान परिस्थितियों में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी संबंधित बंदोबस्त अधिकारी के अधीन कार्य नहीं करना चाहता। “जब तक इन्हें जनपद से हटाया नहीं जाएगा, तब तक हम सभी कार्य बहिष्कार व भूख हड़ताल पर रहेंगे,” यह बात ज्ञापन में साफ तौर पर लिखी गई है।

संघ ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में किसी कर्मचारी के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी विनय कुमार सिंह की होगी।

पूरा विभाग एकजुट:

इस विरोध में चकबंदी विभाग के अधिकारी, सहायक अधिकारी, लिपिक, चपरासी, मानचित्रकार, चकबंदी कर्ता व लेखपाल सभी एकजुट नजर आए। ज्ञापन पर चकबंदी अधिकारी ऐश मोहम्मद, किसलय किशोर द्विवेदी, उमेश चन्द्र पाण्डेय के साथ सहायक चकबंदी अधिकारी उदिता पाण्डेय, आशुतोष नायक, अजय कुमार श्रीवास्तव, शेषराम, अवधेश कुमार, इन्द्रजीत कुमार, जितेन्द्र कुमार, कृष्ण कुमार के हस्ताक्षर दर्ज हैं।

इसके अलावा लिपिक संवर्ग व अन्य कर्मचारियों में राम किशन पाण्डेय, परमानन्द माधवम, रुक्मणी पाण्डेय, पुष्पा लाल, कमला, विद्यावती, नेहा, चन्दना यादव, मोहनलाल, मुकेश कुमार यादव, शशि भूषण यादव, ज्ञान प्रकाश चौधरी, किशन चौधरी, प्रभात कुमार, सच्चिदानंद सिंह दीक्षित सहित 50 से अधिक कर्मियों ने समर्थन दिया है। दर्जनों अन्य चकबंदी कर्ता व लेखपालों के हस्ताक्षर भी ज्ञापन में शामिल हैं।

धरना जारी, प्रशासन पर बढ़ा दबाव:

बताया जा रहा है कि 24 अप्रैल से ही बंदोबस्त अधिकारी कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन जारी है। इससे पहले प्रादेशिक चकबंदी अधिकारी संघ द्वारा विधायक अंकुरराज तिवारी को भी ज्ञापन सौंपा जा चुका है। अब लेखपाल संघ द्वारा डीएम को ज्ञापन दिए जाने के बाद प्रशासन पर त्वरित कार्रवाई का दबाव और बढ़ गया है।

चकबंदी जैसे महत्वपूर्ण विभाग में कामकाज ठप होने से किसानों के भूमि संबंधी मामलों के लंबित होने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में अब सभी की निगाहें जिलाधिकारी की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।