शीर्षक: “गाय का उपकार”
गाँव के किनारे एक बूढ़ी गाय रहती थी। उसका नाम गौरी था। वह अब दूध नहीं देती थी, इसलिए मालिक ने उसे खुला छोड़ दिया था। लोग उसे बेकार समझकर दुत्कार देते, पर गौरी शांत स्वभाव की थी।
एक दिन गाँव में भयंकर सूखा पड़ गया। कुएँ सूख गए, खेत बंजर हो गए। लोग पानी की तलाश में भटकने लगे। उसी समय एक छोटा लड़का, मोहन, जंगल की ओर गया। वहाँ उसने देखा कि गौरी एक खास जगह पर बार-बार अपने खुर से जमीन खोद रही है।
मोहन को आश्चर्य हुआ। उसने भी वहाँ थोड़ा खोदा, तो नीचे से पानी की नमी महसूस हुई। उसने गाँव वालों को बुलाया। सबने मिलकर उस जगह को खोदा, और कुछ ही देर में वहाँ से पानी निकल आया।
गाँव में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों को समझ आया कि जिसे वे बेकार समझ रहे थे, वही उनकी मददगार निकली।
उस दिन से गाँव वालों ने गौरी की सेवा करना शुरू कर दिया। उन्हें यह सीख मिली कि किसी को भी उसके बाहरी रूप या उपयोगिता से नहीं आंकना चाहिए।
शिक्षा:
हर जीव में कुछ न कुछ विशेषता होती है, इसलिए किसी को भी तुच्छ समझना गलत है।
राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
जगदलपुर राजिम
छत्तीसगढ़