टीईटी अनिवार्यता के सवाल को लेकर शिक्षकों का आन्दोलन जारीः धरना प्रदर्शन 26 को
काली पट्टी बांधकर किया शिक्षण कार्य
बस्ती। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व में टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का विरोध लगातार जारी है। राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर शिक्षकों ने बीते सोमवार से बुधवार तक लगातार तीन दिन हाथों पर काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया। इससे पहले बीते 22 फरवरी को राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर शिक्षकों ने एक बड़ा ट्विटर अभियान चलाया था। बस्ती सहित पूरे देश के शिक्षक 26 फरवरी गुरुवार को बीएसए कार्यालय पर विशाल धरना प्रदर्शन करके जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च करते हुए प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपेंगे।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष चन्द्रिका सिंह ने बताया कि 26 फरवरी के धरने में पूरे जिले के शिक्षक ड्यूटी अनिवार्यता के विरोध में कार्यालय पर जुटेंगे और अपनी मांग केंद्र सरकार तक पहुंचाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार द्वारा आदेश वापस नहीं लिया गया, तो मार्च माह में देश की राजधानी दिल्ली में विशाल आंदोलन, घेराव और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। जिला मंत्री बालकृष्ण ओझा ने कहा कि सभी शिक्षक संगठन एकजुट होकर आंदोलन कर रहे हैं। शिक्षकों की आवाज को अनदेखा नहीं किया जा सकता, क्योंकि आंदोलनों के इतिहास में सरकार को हमेशा उनकी मांगों पर विचार करना पड़ा है। जिला कोषाध्यक्ष दुर्गेश यादव और जिला उपाध्यक्ष रवीश कुमार मिश्र ने कहा कि टीईटी अनिवार्य करने का निर्णय वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के साथ अन्याय है। कहा कि शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं और उन्हें अनदेखा कर लिया गया कोई भी फैसला स्वीकार्य नहीं होगा। ब्लॉक अध्यक्ष बहादुरपुर प्रमोद सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष बनकटी सुरेश गौड़, ब्लॉक अध्यक्ष हर्रैया रामसागर वर्मा और ब्लॉक अध्यक्ष रामनगर रवि सिंह ने कहा कि जबरन थोपे जाने वाले टीईटी अनिवार्यता के आदेश को शिक्षक किसी प्रकार से स्वीकार नहीं करेंगे इसके लिए अब आर-पार का आंदोलन होगा।