कुदरहा, बस्ती। सृष्टि के प्रारंभ में जब चारों ओर केवल जल ही जल था, तब उसी अनंत जल में भगवान नारायण योगनिद्रा में थे। उन्हीं के नाभिकमल से ब्रह्मा जी का उत्पत्ति हुआ। जिन्हें सृष्टि की रचैता भी कहा जाता है।
उक्त उदगार काशी पीठ से पधारे राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित सत्यम सांकृत महराज ने ब्यास पीठ से छरदही गांव में चल रही नौ दिवसीय भागवत कथा के तीसरे दिन प्रवचन सत्र में ब्यक्त किया। उन्होंने कथा को विस्तार देते हुए कहा कि ब्रह्मा जी अपनी संकल्प शक्ति से स्वायंभुव मनु और उनकी पत्नी शतरूपा की रचना की। इन्हीं दोनों से मानव समाज की उत्पत्ति मानी जाती है। मनु–शतरूपा ने धर्म और नीति के मार्ग पर चल कर मानव वंश का विस्तार किया। जिससे पृथ्वी पर जीवन और व्यवस्था की स्थापना हुआ। प्रसंग सुन श्रद्धालु भावविभोर हो गए और जय श्री हरि के घोष से पंडाल गुंजायमान हो उठा।
कार्यक्रम आयोजन हरेंद्र प्रसाद दुबे, हरिद्वार दुबे, नरेंद्र कुमार, सुशील दुबे, आनंद दुबे, मनोज कुमार, अभिषेक, वेदमणि दुबे, सतीश तिवारी, रामवृक्ष मिश्र, राम भारत सहित तमाम भक्त मौजूद रहे।
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