🙌🙌ओ३म् 🙌🙌
🌹 *संस्कार मानव आधार
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आज के युग में शिक्षा का बहु-आयामी विस्तार हुआ है।युवक-युवतियां पृथिवी से लेकर अंतरिक्ष तक अपनी प्रतिभा से राष्ट्र का गौरव बढ़ा रही हैं।इतनी ऊंचाईयों को नयी पीढ़ियां छू रही हैं।इसके बाद भी समाज में चारों ओर अशांति है।सामूहिक परिवार इस विकसित युग की दौड़ में *परिवार एकल* होते जा रहे हैं।परिवारों में धर्म उपेक्षित हो रहा है धन स्टेटस बनता जा रहा है।संबंधों के बीच का पैमाना कभी *मर्यादा,शिष्टाचार,सभ्यता* होती थी आज उसका पैमान केवल अर्थशास्त्र बन गया है।एक शोध में ये देखा गया है पैंदा होते शिशुओं में अर्थशास्त्र का ही बीजारोपण किया जा रहा है जिसका ज्वलंत प्रमाण है कि प्राथमिक स्तर से मंहगी शिक्षा,अलग से महंगे कोचिंग,साथ में शिक्षा व शिक्षार्थी के बीज में आर्थिक असमानता ,गुरु शिष्य के बीच में श्रद्धा का मूल्यांकन भी महंगी शिक्षा बन रही है जो *वैदिक समाजवाद* पर कड़ा प्रहार है और मानव-मानव के संघर्ष को *काल मार्क्स* की सोच को प्रोत्साहन दे रहा है!जो भारत जैंसे *बसुधैव कुटुम्बकम्* जैंसे उत्कृष्ट सोच वाले देश के लिए अत्यंत हानिकर है!
🌹 *समाधान क्या है?*🌹
समाधान सटीक एवं सरल है।शिक्षा के एकांगी पन को हटाने के लिए उसे संस्कारों से जोड़ना अनिवार्य हो!राजा से लेकर सेवक तक।नेता से लेकर संतरी,प्रहरी व चतुर्थ श्रेणी तक के परिवारों के बच्चों को *एक ही छत के नीचे* एक ही शिक्षण व्यवस्था मे़ रखा जाए।यही शक्तिशाली राष्ट्र की *सुदृढ़ नीव* है।
दूसरा अहं बिंदु है कि *शिक्षा व संस्कार* के संयुक्त पाठ्यक्र को ही उच्च शिक्षा का मानदंड माना जाए।जिससे हम राष्ट्र को *योग्यता के साथ चरित्रवान,देशभक्त,युवक -युवतियों* की छावनी बना सके!
संस्कार विहीन शिक्षा भौतिवाद के प्रवाह को ओर जाने वाली वर्षा ऋतु की बाढ़ है जिसमें *संस्कार सभ्यता बहकर* चली जाती है।
हमारी सरकारों को चाहिए भारतीय ऋषियों ने जिन *सोलह संस्कारों से मानव-मानवतावाद* आधार शिला रखी है उसका शिक्षण प्राथमिक विद्यालयों से लेकर महाविद्यालयों तक अनिवार्य कर दिया जाय!
इसका परिणाम होगा यह होगा कि *व्यक्ति,परिवार,समाज,राष्ट्र,विश्व* एक सूत्र में संगठित हो जायेगा!
🕉️ *नामकरण संस्कार*🕉️
जनपद बस्ती के स्वनाम धन्य स्व०निर्भय के पौत्र/स्व०इंजीनीयर शिवशंकर जी के कनिष्ठ पुत्र वृजेश दूबे के नवजात शिशु के नामकरण संस्कार के अवसर पर उपरोक्त विचार प्रस्तुत किए।बालक का संस्कार पूर्ण वैदिक विधि से सम्पन्न हुआ।बालक का नाम 🪷 *अथर्व*🪷 रखा गया।जिसका अर्थ होता है
*विद्वान/ज्ञानी/चिंतक* इस अवसर पर वैदिक अग्निहोत्र भी सम्पन्न किया गया।
🔥 *यजमान परिवार*🔥
*[१]* श्रीमती प्रीति दूबे।
*[२]* वृजेश द्विवेदी
मड़ियांव लखन ऊ।
*आचार्य सुरेश जोशी*
📱 *7985414636*📱