अयोध्या के नया घाट पर पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने किया भव्य भंडारे का आयोजन, उमड़ा साधु-संतों और भक्तों का सैलाब

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। धर्मनगरी अयोध्या में, पाँचवें बड़े मंगलवार के पावन अवसर पर, पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने नया घाट स्थित लता चौक के पास एक विशाल और भव्य भंडारे का आयोजन किया, जिसमें सुबह से ही साधु-संतों और असंख्य भक्तों का तांता लगा रहा। प्रभु इच्छा तक चले इस भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। इस पुण्य कार्य में कई जानी-मानी हस्तियों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया। पूर्व सांसद लल्लू सिंह द्वारा आयोजित इस भंडारे में अयोध्या के कोने-कोने से आए साधु-संतों ने विशेष रूप से भाग लिया, जिनकी उपस्थिति से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। भक्तों की लंबी कतारें सुबह से ही प्रसाद ग्रहण करने के लिए लगी हुई थीं, जो भगवान हनुमान जी के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा को दर्शा रही थीं।
व्यवस्थित और स्वच्छ वातावरण:
भंडारा स्थल पर एक अत्यंत व्यवस्थित और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित किया गया था, ताकि सभी श्रद्धालु शांतिपूर्वक और सुगमता से भोजन ग्रहण कर सकें। स्वयंसेवकों की एक बड़ी टीम ने प्रसाद वितरण और संपूर्ण व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सक्रिय भागीदारी ने पूरे आयोजन को सुचारु रूप से संपन्न करने में मदद की। विविध व्यंजनों से परिपूर्ण प्रसाद । भंडारे में विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट और पारंपरिक व्यंजनों से परिपूर्ण प्रसाद वितरित किया गया, जिसे पाकर तमाम श्रद्धालु स्वयं को कृतार्थ महसूस कर रहे थे। प्रसाद की गुणवत्ता और विविधता ने सभी उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
पूर्व सांसद ने व्यक्त किया आभार:
इस अवसर पर पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने कहा कि यह भव्य आयोजन भगवान हनुमान जी की असीम कृपा और आशीर्वाद से ही संभव हो पाया है। उन्होंने सभी उपस्थित साधु-संतों, भक्तों और गणमान्य व्यक्तियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन अयोध्या की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गणमान्य व्यक्तियों ने की सराहना:
भंडारे में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने भी पूर्व सांसद की इस पहल की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक और सामाजिक आयोजन न केवल आपसी भाईचारे और सौहार्द को बढ़ावा देते हैं, बल्कि अयोध्या की गौरवशाली परंपरा को भी सुदृढ़ करते हैं। यह भव्य आयोजन अयोध्या की धार्मिक और आध्यात्मिक चेतना का एक जीवंत प्रतीक बन गया, जिसने सभी उपस्थित लोगों के मन में भक्ति और संतोष का भाव जगाया।