
जिंदगी तब समझ में आती है जब…
(एक दिल छूने वाली कविता)
जिंदगी तब समझ में आती है जब,
खुशियाँ बाँटने वाला कोई नहीं होता,
और तन्हाई में खुद से मिलने का वक्त मिलता है।
जब कोई अपना सात जन्मों का वादा कर बीच में छोड़ जाता है l
जिंदगी तब समझ में आती है जब,
भीड़ में अपनों की कमी महसूस होती है,
रोना आए तो रोया नहीं जाता,
पर चुपचाप बहते आंसू से तकिये भीग जाते हैं।
जिंदगी तब समझ में आती है जब,
सपनों से ज्यादा जिम्मेदारियाँ दिखने लगती हैं,
और हँसी सिर्फ तस्वीरों में बची रह जाती है,जब साथी चुनने से ज्यादा दोस्त का साथ अच्छा लगता है l
जिंदगी तब समझ में आती है जब,
किसी अपने की एक मुस्कान के लिए,
खुद की नींदें कुर्बान करनी पड़ती हैं,
जब बहादुर दिल को लोग कोमलता से तोड़ देते हैंl
जिंदगी तब समझ में आती है जब,
हर हार में एक सीख छुपी मिलती है,
और हर ठोकर हमें थोड़ा मजबूत बना जाती है, जब कमरे की चुप्पी कानों में जोर से चिल्लाती है l
जिंदगी तब समझ में आती है जब,
बीते लम्हों की कदर होती है,
और आने वाले कल की फ़िक्र सताती है,
जब मॉडर्न बनने से ज्यादा सादगी पसंद आती है l
जिंदगी तब समझ में आती है ,
जब हर सवाल का जवाब ‘वक़्त’ देता है,
और हम चुपचाप, बस उसे समझते चले जाते हैं, मौजमस्ती में रहने वाले अचानक मौन हो जाते हैं l
जिंदगी तब समझ में आती है जब
सोशल मीडिया पर ढेरों तारीफें होकर भी कोई अपना गले लगाने वाला नहीं होता,
जब कोई हाल पूछने वाला नहीं होता l
जिंदगी तब समझ में आती है जब कोई पूछे कैसे हो तो ठीक है कहकर मुस्कराते हैं, और अकेले में जाकर जोर से रोकर अपना दर्द बहाते हैं l
जिंदगी तब समझ में आती है जब पुराना प्रेम पत्र का कोई पन्ना फटा सा मिलता है,
जब किताब में रखा सूखा फूल मुस्कराता है l
जिंदगी तब समझ में आती है जब
आलीशान मकान में कोई अपना नहीं होता,जब वापस आ रहा कहकर कोई
कभी मुड़कर नहीं देखता l
जिंदगी तब समझ में आती है जब गानों से ज्यादा अच्छे बोल लगने लगे,
जब बाहर के खाने से अच्छा घर का दाल चावल लगने लगे l
जिंदगी तब समझ में आती है जब
मॉडर्न होने से अच्छा सादगी का आंचल लगने लगे,
जब भीड़ से ज्यादा अकेलेपन का साथ भाने लगे l
जिंदगी तब समझ में आती है l
जिंदगी तब समझ में आती है ll
नेहा वार्ष्णेय “धारा”
दुर्ग छत्तीसगढ़