गणतंत्र दिवस पर उन्मुक्त उड़ान मंच द्वारा भव्य आयोजन हुआ

गणतंत्र दिवस पर नारा लेखन और महाकुंभ के अलौकिक अनुभव उन्मुक्त उड़ान मंच ने मंच की संस्थापिका/अध्यक्षा डॉ दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ के मार्गदर्शन में एक और प्रेरणादायक और भव्य आयोजन कर साहित्यिक क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान को सुदृढ़ किया। गणतंत्र दिवस और महाकुंभ जैसे गहन और प्रेरक विषयों पर आयोजित इस सत्र में विभिन्न रचनाकारों ने अपने अनुपम सृजन से भारतीय संस्कृति, संविधान, और देशभक्ति की भावनाओं को जीवंत किया। गणतंत्र दिवस विशेष सत्र मंच संचालन का भार इस बार वरिष्ठ रचनाकार नीरजा शर्मा ‘अवनि’ ने बखूबी निभाया। तीन रंगों की छटा लिए ४० रचनाकारों ने व अशोक दोशी ने सर्वाधिक नारा सृजन कर,कर्तव्य और अधिकार की चर्चा करते हुए रचनात्मक कविताओं, नारों, और गाथाओं से पाठकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भारतीय संविधान के 76वें वर्ष में प्रवेश पर उपलब्धियों का उल्लेख और देश के विकास के सोपानों के घोषवाक्यों और संदेश ने इस सत्र को गहन और प्रेरक बना दिया। रचनाओं को सुंदर पोस्टर के रूप में परिवर्तित कर मंच की अध्यक्षा दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ ने रचनाकारों के उद्गारों को आसमान की नयी बुलंदियों पर लहरा दिया| महाकुंभ का अद्भुत वर्णन सप्ताहिक विशेष सत्र में महाकुंभ विषय पर रचनाकारों ने अपने आलेख प्रस्तुत किए। प्रयागराज में 144 वर्षों के बाद आए इस कुम्भ में हो रहे इस दिव्य आयोजन के पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व को रचनाकारों ने अपने शब्दों से मानो साकार कर दिया। मंच संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहीं दिव्या भट्ट ‘स्वयं’ ने भक्ति और श्रद्धा भरे भावों को संजोते हुए सत्र को सार्थकता प्रदान की। साहित्यकार संजीव कुमार भटनागर ‘सजग’ ने कहा: “महाकुंभ केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मा के पुनरुत्थान का अवसर है। यह पर्व भारत की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति का जीवंत उदाहरण है, जो हमें धर्म और आध्यात्मिक मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है।” मनजीभाई का मानना है कि धार्मिक सनातनी से जुड़ा ह़़आ महा कुंभ मेला धर्म अध्यात्म का सुन्दर समन्वय के साथ बहती ऋषि कालीन सभ्य संस्कृति का उजागर है । वरिष्ठ साहित्यकारा स्वर्ण लता सोन ‘कोकिला’ के अनुसार महा कुंभ न केवल धार्मिक अपितु सांस्कृतिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। कुंभ मेले में अमृत स्नान के साथ मंदिर दर्शन, दान पुण्य एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान शामिल होते हैं। मीनाक्षी सुकुमारन के अनुसार इतना बड़ा महापर्व सनातन धर्म, संस्कृति का अनुपम, आलौकिक महाकुंभ, स्नान, पूजा पाठ, शांति, आस्था, मंत्रों की ध्वनि, शंखनाद, जयघोष , अनुष्ठान ऐसे में भटकाव का लेशमात्र भी औचित्य नहीं है ये बात स्मरण रखनी चाहिए ये महाकुंभ है आस्था का पर्व। वरिष्ठ साहित्यकारा अनु तोमर ‘अग्रजा’ कहती हैं महाकुंभ हमारी प्राचीन सभ्यता और संस्कृति विरासत है। जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित हो रही है। मानवता के महाकुंभ में डुबकी लगा कर स्वयं कल्याण का आत्मबोध कर, ईश्वर के दिव्य स्वरूप का दर्शन कर रहे हैं। नन्दा बमराडा सलिला कहती हैं भारतीयों के लिए बड़े ही गर्व की बात है कि हम ऐसे देश में रहते हैं जहां कि महाकुंभ जैसे दिव्य भव्य अद्भुत , अनुपम अलौकिक पर्व मनाए जाते हैं जिसमें हम सब लोग अपनी स्वेच्छा से एक साथ मिलकर समर्पित भाव से आस्था की डुबकी लगाते हैं। वीना टण्डन पुष्करा के अनुसार महाकुंभ में भव्य अखाड़े, संतों की शोभायात्रा और ज्ञान की चर्चा इसे अद्वितीय बनाती है। इस पर्व में लाखों श्रद्धालु शामिल होकर धर्म, अध्यात्म और संस्कृति का अलौकिक अनुभव करते हैं। सुरेश चंद्र जोशी सहयोगी ने अपने संदेश से लेखकों का निरंतर उत्साहवर्धन किया, वहीं अशोक दोशी दिवाकर ने रचनाओं की सृजनता और सार्थकता की समीक्षा करी| नीरजा शर्मा अवनिऔर नीतू गर्ग कमलिनी ने अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति से सम्मान पत्र, कोलाज बनाकर कार्यक्रम में उत्साह के रंग भर दिये। इस आयोजन ने साहित्यिक उत्सव का रूप लिया, जिसमें रचनाकारों की भावनाओं ने हर पाठक के मन को छू लिया। डॉ दवीना अमर ठकराल देविका, कार्यक्रम आयोजिका ने कहा उन्मुक्त उड़ान मंच का यह प्रयास साहित्य और संस्कृति को सशक्त करने की दिशा में एक और प्रेरणादायक कदम है।

उन्मुक्त उड़ान परिवार की अनवरत सहयोग, सक्रियता व समर्पण भावना से भविष्य में भी ऐसे आयोजन क्रियान्वित करने के लिए संकल्पित है।