आत्म परिवर्तन के शारदीय नवरात्र का नौ दिवसीय आयोजन अत्यंत धूम धाम व श्रद्धा भाव से स्वतंत्र लेखन मंच पर मनाया गया

स्वतंत्र लेखन मंच के संस्थापक डॉ विनोद वर्मा दुर्गेश ‘मुकुंद’ के नेतृत्व , अध्यक्षा डॉ दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ के निर्देशन, सह अध्यक्षा डॉ अनीता राजपाल ‘वसुंधरा’ के मार्गदर्शन, उपाध्यक्ष सुरेश चंद्र जोशी ‘सजग’ व

अनूठी कार्यकारिणी के सहयोग से एक अनूठी पहल को साकार किया गया| इस पहल के अंतर्गत प्रतिभागी रचनाकारों को नवरात्रि में माँ के नौ रूपों को घनाक्षरी विधा में गाकर प्रस्तुति देनी थी| हिन्दी साहित्य के स्वर्णयुग में जहाँ भावों में भक्ति और अध्यात्म का वर्चस्व था वहीं काव्य शिल्‍प छंद का सर्वत्र प्रभाव था । इस समय दोहा छंद के बाद सर्वाधिक प्रचलित एवं लोकप्रिय छंद घनाक्षरी रहा । घनाक्षरी एक वार्णिक छंद है, जिसके चार पद होते हैं, प्रत्येक पद में चार चरण होते हैं पहले तीन चरण में 8-8 वर्ण और चौथे चरण में 7 या 8 या 9 वर्ण होते हैं । अंतिम चरण में वर्णो की संख्या के आधार पर घनाक्षरी के प्रकार का निर्माण होता है । आत्म परिवर्तन के शारदीय नवरात्र आयोजन का शुभारंभ डॉ दवीना अमर ठकराल देविका के संबोधन वीडियो के माध्यम से हुआ। उन्होंने माँ के नौ रूपों का भाव व अर्थ नारी के संपूर्ण जीवन को इंगित करते हुए अत्यंत सुंदर ढंग से परिभाषित किया।

आयोजन के पहले दिन 03 अक्टूबर को माँ के शैलपुत्री रूप का मनहरण घनाक्षरी में वंदन हुआ, जिसमें 29 रचनाकारों की सहभागिता और मंच का संचालन अमिता गुप्ता नव्या ‘सुरभि’ ने किया| इसी क्रम में प्रत्येक दिन माँ के नव रूपों का दर्शन और वंदन विभिन्न कलमकारों द्वारा किया गया| द्वितीय दिवस माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना जलहरण घनाक्षरी में एकता गुप्ता ‘महक’ के संचालन में 22 रचनाकारों ने करी| तृतीय दिवस माँ चंद्रघंटा का वंदन देव घनाक्षरी में रेखा पुरोहित ‘तरंगिणी’ के संचालन में 23 रचनाकारों ने की।चतुर्थ दिवस माँ के कुष्मांडा रूप को रूप घनाक्षरी में दिव्या भट्ट ‘स्वयं’ के संचालन में 23 रचनाकारों ने की | पंचम दिवस माँ स्कंदमाता की महिमा का वर्णन मनहरण घनाक्षरी में सुमन किमोठी ‘वसुधा’ के नेतृत्व में 23 रचनाकारों ने किया| छठे दिवस माँ कात्यायनी को नमन करते हुये विषय निरूपक नीतू रवि गर्ग ‘कमलिनी’ने देव घनाक्षरी में 24 रचनाकारों की रचनाओं का उत्साहवर्धन किया| सप्तमी को माँ कालरात्रि की महिमा का वंदन अशोक दोशी ‘दिवाकर’ ने जलहरण घनाक्षरी में 24 रचनाकारों के साथ किया| अष्टमी को माँ महागौरी का पूजन होता है और इस दिन रूप घनाक्षरी में सुरेश चंद्र जोशी ‘सहयोगी’ के साथ 29 रचनाकारों ने स्तुति की | अंतिम दिवस अर्थात नवमी को माँ सिद्धिदात्री से सिद्धि की आकांक्षा रखते हुए संजीव कुमार भटनागर ‘सजग’ के साथ 20 रचनाकारों ने माँ का गुणगान किया|

उपरोक्त प्रतियोगिता के साथ संध्या समय देवी रूप लिए रचनाकारों द्वारा एकल पाठ किया गया जिससे ण केवल मंच भक्तिमय रहा अपितु एक सार्थक और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ| 3.10.24. सुमन किमोठी वसुधा श्वेत रंग में,

4.10.24…. वीना टण्डन पुष्करा नारंगी रंग को प्रधानता देते हुए, 5.10.24.. रेखा पुरोहित तरंगिणी माँ के प्रिय लाल रंग में, 6.10.24.. अनु तोमर अग्रजा द्वारा अनंत का परिचायक नीला रंग धरण करते हुये, 7.10.24 संगीता चमोली इंदुजा द्वारा हर्ष और उल्लास भरा पीला रंग, 8.10.24.. नंदा बमराडा सलिला प्रकृति रूप लिए हरा रंग, 9.10.24- दिव्या भट्ट स्वयं और स्वर्ण लता सोन कोकिला द्वारा स्लेटी रंग परिधान में, 10.10.24- अनुपा कुमेड़ी और अलका जैन आनंदी चंचला द्वारा बैंगनी रंग को धारण कर, 11.10.24- रंजना बिनानी काव्या स्वरागिनी ने लाल रंग और अंत में 12.10.24- सरोज डिमरी द्वारा गुलाबी रंग में वातावरण और परिधान में माँ की वंदना आराधना न केवल घनाक्षरी अपितु अन्य विधा और विधान में कर आत्मपरिवर्तन के शारदीय नवरात्रि की सार्थकता और उत्सव को नए आयाम दिये|

प्रतिभागियों में सुरेश चंद्र जोशी ‘सहयोगी’, संजीव कुमार भटनागर ‘सजग’, अशोक दोशी ‘दिवाकर’, दिव्या भट्ट ‘स्वयं’, सुमन किमोठी वसुधा, नीतू रवि गर्ग’ कमलिनी’,नीरजा शर्मा ‘अवनि’,स्वर्ण लता सोन ‘कोकिला’, रेखा पुरोहित तरंगिणी, एकता गुप्ता काव्या ‘महक’, अमिता गुप्ता नव्या ‘सुरभि’,आशा बुटोला सुप्रसन्ना, फ़ूल चंद्र विश्वकर्मा भास्कर ललित कुमार भानु, नन्दा बरमाडा ‘सलिला’ ,संतोषी किमोठी वशिष्ठ , सविता मेहरोत्रा ‘सुगंधा’, मोहन प्रसाद यादव साधक , अरुण ठाकर कवित्त, रंजना बिनानी स्वरागिनी , डॉ पूनम सिंह सारंगी, अनु तोमर अग्रजा , वीना टण्डन पुष्करा, डॉ पूर्णिमा पाण्डेय, संगीता चमोली इंदुजा, सरोज डिमरी, अनु भाटिया, बबीता भाटिया, किरण भाटिया नलिनी, चंद्र भूषण निर्भय, अनु भाटिया, सिद्धि डोभाल सागरिका, माधुरी श्रीवास्तव मंजुला सिन्हा, बेली राम कनस्वाल, सुरेंद्र बिंदल, मीना तिवारी, अंजू कश्यप, कृत्या नंद, डॉ वंदना खंडूरी, कमला उनियाल, मनंजी भाई, नृपेंद्र चतुर्वेदी आदि की रचनाओं ने स्वतंत्र लेखन मंच को सुवासित कर दिया|

प्रतियोगिता और प्रतिभागिता के लिए नीरजा शर्मा ‘अवनि’, सुमित जोशी ‘राइटर, जोश’, सुनील भारती और नीतू गर्ग ‘कमलिनी’ ने रचनात्मक पोस्टर, कोलाज और वीडियो बनाए, साथ ही अनुपम प्रशस्ति पत्रों के नवल रूप से रचनाकारों को सम्मान प्रदान किया, जो कार्यक्रम की गरिमा के अनुरूप थे। डॉ दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ के उद्बोधन ने रचनाकारों के लिए प्रेरणा और प्रोत्साहन का कार्य किया। कार्यक्रम की समीक्षा अशोक दोशी ‘दिवाकर’ और सुरेश जोशी ‘सहयोगी’ ने अपने अनूठे अंदाज में की। मीडिया प्रभारी कृष्ण कांत मिश्र ‘कमल’ व संजीव भटनागर ‘सजग’ का सहयोग को रेखांकित करने योग्य हैं।

डॉ दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ के अनुसार नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा की जाती है. मां दुर्गा शक्ति और साहस की देवी हैं| इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है और पूजा करने से सुख-समृद्धि, शांति की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के दौरान व्रत रखने से मन-मस्तिष्क शुद्ध होता है और सोच सकारात्मक रहती है| शारदीय नवरात्रि में माँ का वंदन के इस अनोखे प्रयास ने इस पर्व में नयी ऊर्जा, अपने में विश्वास और उमंग के नए मानक स्थापित किए जो कार्यकारिणी के सराहनीय व प्रशंसनीय सहयोग के कारण संभव हो सके।

मंच अध्यक्षा/ संयोजिका/ संरक्षिका/ संचालिका ने

अपने उद्बोधन में जल्द ही एक नव व अनूठा आयोजन स्वतंत्र लेखन परिवार की और कुशल कार्यकारिणी व प्रबुद्ध सृजन कारों के सराहनीय व उल्लेखनीय सहयोग से मंच पर लाने की घोषणा की।