उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद के प्रति मन के उद्‌गार

धरा-वधू कैसी रसवन्ती ।

प्रेमचंद की आज जयन्ती ।

भीतर से वह अति उदा‌र थे ।

बहुत बड़े साहित्यकार थे ।

सत्यवचन वह सदा कहे हैं ।

उपन्यास सम्राट रहे हैं ।

प्रेमचंद थे अद्‌भुत ज्ञानी ।

लिखी उन्होने बहुत कहानी ।

उनकी कृतियाँ आज अमर हैं ।

वह जनमानस के अन्दर है ।

उनका उपन्यास गोदान ।

सब कृतियों में परम महान ।

उन‌का सृजन यर्थाथ तरल है ।

भाषा कितनी सहज सरल है ।

हे साहित्य जगत के साधक ।

माँ सरस्वती के आराधक ।

किया समृचे जग में नाम ।

कोटि-कोटि है तुम्हें प्रणाम ।

डॉ० वी० के० वर्मा

आयुष चिकित्साधिकारी,

जिला चिकित्सालय बस्ती ।

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